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Showing posts from August, 2021

सार छंद *सीता स्वयंवर*

सार छंद *सीता स्वयंवर* सीता की वह शक्ति देखकर,पिता जनक ने जाना, दुहिता का वह दिव्य रूप अब,भली भांति पहचाना।।  हुए अचंभित तात जानकी ,सिय धनुष  संग खेली , शिवजी का वह  धनुष दिव्य था, जान गई अलबेली।। ली प्रतिज्ञा मिथिला नरेश ने, शिव कमान जो तोड़े, आज उसी के साथ जानकी ,का गठबंधन जोड़ें। निर्णय लिया स्वयंवर का शुभ ,बजने लगी बधाई, दूर दूर से  भूपति आये,गिनती ना हो पायी।। पाकर के मिथिलेश निमंत्रण, मुनि वशिष्ट   हरषाये , मिलते ही सहमति दशरथ की,राम लखन को लाए।। मात-पिता की आज्ञा पाकर ,जब आये रघुराजा, हर्षित हुए देव गण सारे, बजे नाद औ बाजा।। देख राम को  उस उपवन में, सिया देख मुस्कायी , मन ही  मन में  प्रण कर डाला,पाने  है रघुराई ।। पूनम शुक्ला

सार छंद। बाल साहित्य । भारत के हैं बालवीर हम,

सार छंद।  बाल साहित्य  ।  भारत के हैं बालवीर हम, ताकत दिखलाएंगे।  वीर सिपाही कथा देश की , आके   बतलायेंगे ।। *आज विश्व मे धूम मचाने ,की हमने है ठानी । *कायर हमको जो समझे वह,उसकी  है नादानी ।।    राम हमीं थे कृष्ण हमीं थे,मर्यादा जानी थी । वीर शिवा की  साहस गाथा, जानी पहचानी थी।। सूरज चांद और तारे बनकर, नभ मे हम चमकेंगे ,  वीर प्रताप भरत बैरागी ,जग पर अब विचरेंगें  ।। मात पिता की सेवा करना , है कर्तव्य हमारा, *दूर देश में रच बस जाना,हमको नही  गवाँरा*।। तक्षशिला नालंदा गौरव,हमको अब लाना है, भारत माँ के है सपूत  हम, परचम फहराना है।। पूनम शुक्ला

सार छंद भारत देश हमारा प्यारा

 सार छंद भारत देश हमारा प्यारा, रंगों का संगम है , अनुपम छटा धरा बिखेरती, मौसम  सुन्दर नम है । उत्तर से दक्षिण तक फैली ,पावन सतलज गंगा ,  इंद्रधनुष जो सजा नभ में,लगे बहुत सतरंगा।।  फल फूलों से भरी भूमि ये, नवजीवन देती है । कल कल करती जलधार यहॉं , तन मन हर लेती है ।  पग पखारने को मन आतुर  , दूर  से निहार रहा, समेटे किरणों को आदित्य क्षितिज पर वार रहा ।। पूनम शुक्ला

मेरा भाई बड़ा न्यारा ,मनहरण

 विषय- रक्षाबंधन* *पूर्वाक्षरी अलंकृत मनहरण घनाक्षरी* (वर्णिक छंद, 8,8,8,7 पर यति, 31 वर्ण प्रति चरण, चार चरण, चरणांत गुरु!  मेरा भाई बड़ा न्यारा , लगता है मुझे प्यारा , रक्षाका त्योहार शुभ, कहें हम शान से । रे मनवा बात सुन मन बात कभी गुन  , बंधन निभाएं सदा , जाएँ हम मान से ।। भैया तेरा साथ ठीक, मन आज खूब नीक आएँ बीते दिन याद, प्यारा मुझे जान से ।। याद आज आएं सभी , नहीं भूले हम कभी , रखते सबका ध्यान , खुशी जान गान से ।। पूनम शुक्ला

सरसी छंद विषय श्रृंगार रूप मोहिनी

 सरसी छंद विषय श्रृंगार रूप मोहिनी सी दिखती हो,  बोलूँ क्या मैं आज .। देखूं तेरी सुंदरता मैं,  आती तुझ को लाज ।। सागर जैसी आँखों वाली ,  रंग सुहावन नील,  रूपमती तू कुछ ना  कहना , बैठ किनारे झील ।। अरे प्रेम से बैठ किनारे , रहे हमेशा साथ ।  केवल तेरा रूप निहारुँ ,  ले हाथों में हाथ।।  भिन्न भिन्न भी मौसम आए,  गर्मी बरखा शीत , जग से हमको क्या लेना हैं ,  गाएँ हम तो  गीत ।। कोयल जैसी बोली तेरी  नैनों में है नूर , सुर्ख गुलाबी अधर चमकते ,  मद में हैं  हम चूर ।। पूनम शुक्ला

सरसी छंद् सुंदर जीवन है तुम देखो,

 सरसी छंद् सुंदर जीवन है तुम देखो,करते तुम क्यों नाश ।  जहरीली है यह सब चीजें,बने हुए हो  दास ।।  मात-पिता ने पाल पोष कर ,किया कौन अपराध।  तुम पर है वे जान छिड़कते ,करते प्यार अगाध ।।  देकर सिला कौन सा तुमने,दिला दिया है मान।  भारी मन से चले गए वे , दिया सदा ही ज्ञान । कपड़ा रोटी नही पास में  ,रोते बच्चे आज।  छोड़-छाड़ के ऐसा जीवन,करने लग कुछ काज ।। नाली में तुम लोटा करते,पीके खूब शराब , मत कर यूँ बरबाद जवानी ,  सेहत होय खराब।  नहीं करे सरकारी बातें  ,लगे नशे पर रोक । बीमारी से दूर रहे सब ,भला लगे यह लोक।। पूनम शुक्ला

सरसी छंद देशभक्ति

 सरसी छंद  विषय  देशभक्ति नमन पटल 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 हमें देश से प्यार बहुत है,करते हम सम्मान। झूला करते फंदे पर हम,रखकर इसका  मान ,   बनकर के तुम सभ्य नागरिक,मानो कभी न हार। मात पिता की सेवा करना,यह भी एक प्रकार। काम समय पर पूरा करना ,होता ना आसान  मिल जुल कर हम रहना सीखे ,अपना देश महान ।।   भूल नहीं  सकते अतीत के,जीवन भर अहसास । देशभक्त की ज्वाला दिल में, जलती रखना पास।।  मिली हमें आजादी कैसे,रखते  हमतो याद । देश हमारा रहे सुरक्षित,करते हम  फरियाद।। विश्व गुरु बनकर यह भारत ,रहा बांटता ज्ञान । आज सभी मिल पूजा करते ,भारत  देश महान ।। पूनम शुक्ला

सरसी छंद। गंगा तेरा रूप विमल

 सरसी   छंद  गंगा तेरा रूप  विमल है ,है अमृत सी धार । तेरे पग को चूमा करते ,बाल  वृद्ध नर, नार । उच्च चोटियाँ देख हिमालय ,करता है सत्कार।  सीमा पर है सिंधु सुशोभित,सब का है अधिकार।  प्रहरी बन रक्षा करता है ,देख शत्रु को आज । भारत के सिर  चमक रहा जो ,कैसा सुंदर ताज।  जगत  गुरू  के   पथ  पर चलकर ,आज हमें अभिमान । भारत देश हमारा प्यारा ,करते हम सम्मान।। पूनम शुक्ला

सरसी छंद सावन में जब आती राखी

 सरसी छंद  विषय  रक्षाबंधन नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 सावन में जब आती राखी , समय बड़ा अनुकूल। रक्षाबंधन पर्व  मनोरम,  कैसे जाऊँ भूल ।  राखी का रिश्ता है कोमल,आए मन में प्यार  , बदले में सम्मान चाहिए,नहीं हमे उपहार।। रक्षा करना सब बहनों की, जब समय प्रतिकूल।  रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाऊँ भूल । बरस बरस जब कई बीतते, आते तुम हो याद , बहना जब घर तेरे आए ,करे नही फरियाद। अपनी रक्षा खुद भी समझे ,रहे संग त्रिशूल । रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाऊँ भूल ।। अटल प्रेम का धागा है यह, सजे कलाई शान ,  रक्षा सूत्र बँधे हाथों पर,रखना तुम भी मान।  सब पसंद के मेवे लाएँ  ,लाएँ सुंदर फूल , रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाएँ भूल।। कुमकुम चंदन सजा थाल है,आया शुभ दिन खास , रेशम की डोरी मैं  बाँधूँ , जब तुम आओ पास । बना रहे त्योहार मनोरम, सब का है यह मूल,  रक्षाबंधन पर्व मनोरम ,कैसे जाएँ भूल ।। सावन में जब आती राखी , समय बड़ा अनुकूल। रक्षाबंधन पर्व  मनोरम, कैसे जाऊँ भूल ।। पूनम शुक्ला

हरिगीतिका छंद किसान

 हरिगीतिका छंद  किसान जब बाढ़ हो अति  की कहीं जब सूखते खलिहान हो । तन  हानि हो धन हानि हो तुम देव तुल्य किसान हो ।। तुमने किया जब प्यार माँ हित पूजते नर है सभी ,  उपकार है हम मानते प्रभु दे नहीं विपदा कभी ।।  कुटिया गिरे जब  फूस की लपटें उठे जिय में तभी , सुख में कटे हर सांस भी शिव  नाम जो जपते कभी ।।  दिन-रात पालनहार हो तुम देव तुल्य किसान हो ,  मन से करें हम प्रार्थना जग में नहीं कम मान हो ।। पूनम शुक्ला

हरिगीतिका छंद सावन

 हरिगीतिका छंद सावन 🌹🌸🌹🌺🍁🌻💦🌹🌸 चपला करे यह गर्जना नभ ,को लगे  यह गीत सा। जब बूंद बारिश की पड़े तब ,नेह  हो मन मीत सा।। बनिता सुहागन सी लगे कर, लाल हो प्रिय नाम के। टिकली सजी जब लाल मस्तक, बैठना दिल थाम के।। परिधान भी पहने हरा नव ,चूड़ियां कर में सजे । जब छाय सावन मेघ सप्तक, तार  भी मन में बजे।। पड़ती फुहार चली हवा घन ,भी मनोरम छा गये । घनश्याम को घनश्याम ही अब,देखते मन भा गये।।  पूनम शुक्ला बहुत सुंदर वाह वाह वाह वाह👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏

प्रेम मृदु व्यवहार ,

 घनाक्षरी   प्रेम मृदु व्यवहार ,धर्म-कर्म बारंबार , समर्पित स्तुति मंत्र,  चंचल कन्हैया को।।  प्रेम कृत्य अत्यधिक , कृष्ण सत्य धर्म निष्ठ,  ध्यान संग समर्पण,  कृष्ण श्वेत गैया को ।। नित्य वर्ण रंग दीप्त ,बुद्धि पुरुषार्थ तीक्ष्ण , ध्येय शक्ति श्रेष्ठ कर्म , लक्ष्य बंधु भैया को ।। चरित्र  अयोध्या नृप ,परिश्रमी पुरुषार्थ , हिम्मत विपत्ति ध्येय ,  मित्र मार्ग नैया को ।। पूनम शुक्ला

कृष्ण मित्र युधिष्ठिर ,

 घनाक्षरी कृष्ण मित्र युधिष्ठिर ,शांत चित्त् ध्येय स्थिर , दुर्योधन संग व्यास , स्तुति स्वयं संधि की ।। अर्जुन कर्तव्य लग्न ,पुरुषार्थ कान्हा मग्न ,  विपत्ति कर्तव्य कार्य , भ्रान्ति उपलब्धि की ।। संतान द्रुपद नृप , द्रौपदी सुंदर स्वयं,  दिव्य मित्र कृष्ण प्राप्त,  कीर्ति अभिवृद्धि की।।  भीष्म द्रोणाचार्य कृप , शक्ति युद्ध संग सृप ,  परित्याग दीप्त ध्वजा , बुद्धि  निरबुद्धि की ।। पूनम शुक्ला

सरसी छंद विषय श्रृंगार

 सरसी छंद विषय श्रृंगार रूप मोहिनी सी दिखती हो,  बोलूँ क्या मैं आज .। देखूं तेरी सुंदरता मैं,  आती तुझ को लाज ।। सागर जैसी आँखों वाली ,  रंग सुहावन नील,  रूपमती तू कुछ ना  कहना , बैठ किनारे झील ।। अरे प्रेम से बैठ किनारे , रहे हमेशा साथ ।  केवल तेरा रूप निहारुँ ,  ले हाथों में हाथ।।  भिन्न भिन्न भी मौसम आए,  गर्मी बरखा शीत , जग से हमको क्या लेना हैं ,  गाएँ हम तो  गीत ।। कोयल जैसी बोली तेरी  नैनों में है नूर , सुर्ख गुलाबी अधर चमकते ,  मद में हैं  हम चूर ।। पूनम शुक्ला

प्रभु राम की कर साधना

बजरंग बली प्रभु राम की कर साधना खुश हो बली सच  जान लो । रवि को करें भय ग्रस्त ये कपि बात भी तुम मान लो। प्रभु  राम का अब दूत है यह श्रेष्ठ शक्ति अपार है। हम धाम में उनके चले अब आज मंगलवार है। तुम यूं  नवाकर शीश को कर आरती हनुमान की।  कर कामना जग की सुने अब राम  के गुणगान की । कपिराज को गुनते सभी इस बात का अभिमान है । शुचि शील  शोभित पा सके वर भाव ही  अरमान है  ।। पूनम शुक्ला

विषय अर्थ जब खोने लगे ।

 कविता विषय   अर्थ जब खोने लगे । रिश्ते   भी  जब   अजीज  होने  लगे,  नैना   भी  दिल के   साथ रोने लगे ,  करना प्रतीक्षा  उस  एक   दिनकी,  नाम के   अर्थ भी  जब खोने लगे। किस रिश्ते की बात करते जनाब आज कोखजयी उदासीन है बेहिसाब , फर्क पड़ता नहीं माँ रहे दिनरात भूखी , और पाना चाहता है सुपुत्र  का खिताब । पिता ने लाकर दी थी नीतिपरक किताब , पर उसके पन्नों पर चिपके रहते थे गुलाब , हमें क्या हमें तो चाहिए नशा और कबाब  उस पिता  के  पास  दूजा ना हो कोई ख्वाब । रिश्ते बेईमानी से लगने लगे ,   शब्द अब  अर्थ   जब खोने  लगे ,  अरे वाह   बड़े समझदार , तुमभी समय के साथ होने लगे ।। पूनम शुक्ला

नया प्राण नहीं जान

 घनाक्षरी 🌹🌸🌺🍁🌻🌹🌹🌹 नया प्राण नहीं जान ,देख ध्वजा बड़े शान ,  फहरा तिरंगा बन,  अरमान देश का।।  हंस कर झूल गए ,कष्ट सब भूल गए , माता भारत  सपूत , अभिमान देश का ।।  खुशी आज जन-जन ,जश्न मना हर मन ,  आजादी मशाल जले , मान  है देश का ।। शक्ति दिखे केसरिया, धैर्य धारण धवल , हैअमृत महोत्सव , पहचान  देश का।। पूनम शुक्ला

चपला करे यह गर्जना

 हरिगीतिका छंद  सावन , चपला करे यह गर्जना नभ ,को लगे  यह गीत सा। जब बूंद बारिश की पड़े तब ,नेह  हो मन मीत सा।। बनिता सुहागन सी लगे कर, लाल हो प्रिय नाम के। टिकली सजी जब लाल मस्तक, बैठना दिल थाम के।। परिधान भी पहने हरा नव ,चूड़ियां कर में सजे । जब छाय सावन मेघ सप्तक, तार  भी मन में बजे।। पड़ती फुहार चली हवा घन ,भी मनोरम छा गये । घनश्याम को घनश्याम ही अब,देखते मन भा गये।।  पूनम शुक्ला

हरियाली तीज आज

 घनाक्षरी हरियाली तीज 🌹🌸🌹🌸🌺🍁 सभी बहनों व  साखियों को ढेर सारी शुभकामनाएं । हरियाली तीज आज ,नहीं कोई दूजा काज ,  सँवरने सजनेका, दिन आज खास है।।  गृह निज झूला झूले ,पैग बढ़ा नभ छुले ,  हाथ चूड़ी माथे बिंदी , मन जब रास है  ।। जगको प्रसन्न कर , नारी सुहागन रख ,  पूजा करूं गौरी मैया , जब तक सांस है।।  लाल हरे  परिधान , सजे हम बड़े शान ,  मांगमें सिंदूर शोभे , मन परिहास है ।। पूनम शुक्ला

जय बजरंग बली

जय बजरंग बली प्रभु राम की कर साधना खुश हो बली  सच  जान लो । रवि को करें भय ग्रस्त ये कपि बात भी तुम मान लो। प्रभु  राम का प्रिय दूत है यह, श्रेष्ठ शक्ति अपार है। हम धाम में उनके चले अब आज मंगलवार है। तुम यूं  नवाकर शीश को कर आरती हनुमान की।  कर कामना जग की सुने अब राम  के गुणगान की । कपिराज को गुनते सभी इस बात का अभिमान है । शुचि शील  शोभित पा सके वर भाव ही  अरमान है  ।। पूनम शुक्ला

शुभ रविवार आया

 मनहरण घनाक्षरी 🌻🍁🌺🌸🌹🍁🌺🌸🌹🌹 शुभ रविवार आया , ताप नहीं कम लाया , बार बार देखे नभ , चहुँ ओर घूम के ।। लालिमा चमक  लिए,  संध्या संग सजे दिए , सूरज पश्चिम ओर , गया खूब धूम  के ।।  अन्न धान सूख गए,   इंद्रदेव रूठ गए,  बूँद नहीं पानी लायें, मेघा बड़े सूम के ।।  बाल वृद्ध गली-गली ,  खिले नहीं एक कली,   आराधना करें धरा ,  आओ मेघा झूम के ।।   पूनम शुक्ला

कंठ मात माला साजे

 घनाक्षरी जय माँ शारदे  🌹🌸🌺🍁🌻🌸🌺🍁🌹 कंठ  मात माला साजे ,  शुभ हाथ वीणा बाजे , महामाया शतरूपा,  *जन गीत गाएँ  रे*।।  उर सभी पाप हरो ,  मम शब्द कोश भरो,  कमल आसन शोभे ,  *सब सुख आएँ  रे*  ।। शत रूपा बल प्रदा , महा भद्रा  ज्ञान प्रदा ,  तेरा रूप जब प्यारा ,  *हम वारी जाएँ रे* ।। तुम को निहार रहे ,सब कुछ वार रहे , ज्ञान भक्ति मांग कर, *हिय सुख पाएँ रे* ।।  पूनम शुक्ला

शिव धाम में अभिषेक पूजन,

 हरिगीतिका छंद  शिव  धाम में अभिषेक  पूजन, आरती मन से करो ।  फल  फूल बेल   करों समर्पित, शंकरा   विपदा हरो ।  तम को  मिटाकर ज्ञान सागर ,जो अभी तुम  से लिया ।  अब  चाहिये  जग का सुमंगल, भक्ति भाव सदा किया ।  महिमा  सदा करते सती सुत , साथ ही  तुमको जपे । गुणगान जो मन  से करें  वह,  रत्न के   सम  यूं तपे ।  नभ से धरा तक कौन है अब, मोह जाल  नहीं फसें ,   हिम से करें गिरि को सुशोभित,अंबिका मन में बसे ।। पूनम शुक्ला

कुहू करे आम बौर

 उत्कृष्ट   घनाक्षरी कुहू करे आम बौर ,मन भाये करे शोर , मीठी वाणी बोल कर , हमको बुलाती हो  । कोयल कूहके संग ,पक्षी भिन्न भिन्न रंग , वसंत उमंग जब, गीत मृदु गाती हो ।। इधर उधर डोले ,कम रवि आग गोले , गीत सुने आम जन , हृदय  लुभाती हो ।। कागा पीहू एक रंग ,रहते कभी नही संग , गुड़ जैसी बोली *तुम* , किधरसे लाती हो???  पूनम शुक्ला

पुष्प घर मेरे सजे

घनाक्षरी पुष्प  घर मेरे  सजे , वाद्य यंत्र नित्य बजे ,  राधेश्याम मन बसे , मीरा संग आइए  ।।  हम करें प्रतिदिन ,कंठी माला गिन-गिन , ओम करें शिव जाप , संग मेरे गाइए ।। धूप बत्ती करें पूजा ,आप सम नहीं दूजा , प्रभु गुण गान कर  , गृह  महकाइए ।   पूजा थाल कर लिए ,शिव धाम चल दिए , गौरा संग सुत  शिव ,  घर बस जाइए।। पूनम शुक्ला

शुभ कपि राज वार

 शुभ घनाक्षरी 🙏🌻🌹🌸🌺🍁🌹🌻🙏 शुभ कपि राज वार , चढ़ा फूल पत्र हार ,  प्रभु राम दूत यह ,  करें सब मान हैं ।। रवि रहे भय ग्रस्त , दुख कष्ट्र हम त्रस्त , देदो आशीर्वाद हमें ,  नहीं कुछ ज्ञान है ।। सजा राम दरबार, नैया मेरी करो पार ,  पैर तले बैठ कर,  देखो कैसी शान है ।। हनुमत   रक्षा  करें, भूत प्रेत  सब डरें ,  बजरंग बाण जप ,  अति मृदु गान है।। 🌻🌹🌻🌹🌹🌹🌹🌹🌹 पूनम शुक्ला

जगत जननी माते

घनाक्षरी  जगत जननी माते , गुण हर  पल गाते  , बेड़ा पार लगा देना ,  आरती उतारुँ मैं ।। आदि शक्ति जगदंबा  , गृह नित  पूजे  अम्बा , उपकार मान तेरा ,  चरण निहारुँ मैं ।।  बलप्रदा महाबला ,बहुलप्रिया बहुला ,  तेरा शत नाम पूज , जीवन  सवारूँ मैं ।।  विष्णु माया भद्रकाली , गीत गाएँ  बजा ताली , महिषासुरमर्दिनि , *तन मन हारूँ मै ।।

बाला देखे नभ रंग

 बाला देखे नभ रंग ,मोहक मुस्कान संग,  नीला रंग खूब सजे ,  देखें मनुहार के ।।  हृदय हिलोर  मारे ,छाये धरा नभ तारे ,मन भाये ये सावन, गीत है मल्हार के ।।  देख पिय शरमाई  ,प्रेम गीत खूब गायी , आनंद समाये मन , दिन ये त्योहार के ।  जीवन सुखद क्षण ,साक्षी बना कण कण  , गीत राग मन बसे ,  प्रीत उपहार के ।। पूनम शुक्ला

आओ मेघा कहे रानी

 घनाक्षरी मेघा आओ मेघा कहे रानी ,जल्दी लाओ खूब पानी,  काले काले मेघ प्यारे ,  आओ घर छोड़ के ।।  उमड़ घुमड़ कर  ,बरस बरस कर , कहे रानी आना अब , बादलों को तोड़ के ।।  नदी बहे कल कल  ,भीगें  हम इस जल , नाव  मेरी तेज चले ,  कागज को मोड़ के ।। लाएँ छाता  स्कूल जाएं ,खूब शिक्षा हम पाएँ , पूनम नमन करें  देख कर जोड़ के ।। पूनम शुक्ला

गरज गरज कर

 घनाक्षरी   रिमझिम  गरज गरज कर  ,बरस बरस कर , छूने सावन आँगन , *आतुर है बदली* ।। तरु डाली झूला झूले , पैग बढ़ा नभ छूले ,  मोर नाचे बगियन ,  *गीत गाएँ  कोयली*  ।। पीहरवा मन करे ,  अश्रु लगे अब झरे,  मोहन संग राधा ज्यूँ ,  *खिलखिला हँसली*  ।। इंद्रधनुष रंगों पे , पूनम की तरंगों पे ,  कजरी सुनाती हमें ,  *घन घना बिजली* ।। क्रमांक 28

आवन लगे हैं रवि

 सिंहावलोकन मनहरण घनाक्षरी  आवन लगे हैं रवि ,देख नभ प्यारी छवि, इंद्र देव मान गए,  *मेघा  छावन लगे*! छावन लगे ये मन,खुशी भायी हर जन , ऋतु हरियाली लाये *गीत पावन लगे*!    पावन लगे हैं जिया ,याद अब आई पिया , रिमझिम जल बूँद , *वर्षा सुहावन लगे* । सुहावन लगे रवि ,बाढ़ त्रस्त लोग सभी  , *करे पूनम वंदना , *सुख आवन लगे*! पूनम शुक्ला

सुत आज जन्म दिन

 घनाक्षरी 🙏🙏🙏🙏🌺🌸💃🏼🌸🌺🍧🎂🍚🍜🍮🍬🍿 सुत  आज जन्म दिन ,साल बीता दिन गिन , उर में आनंद छाये ,  *कहे हम राम से* ।।  सफलता प्रभु देना ,दुख सब हर लेना ,  बरस शतक  जिए ,  *मन लगे काम से* ।।  सुत है सूर्यांश प्रिय ,मन खुश आज हिय ,  यश  फैले इस जग , *उसके ही नाम से* ।। खुशी मिले हर पल, सुख शांति तन बल ,  सब मिल नाचे गाएँ , *धूमधाम शाम से* ।। पूनम शुक्ला