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Showing posts from July, 2021

मन में उमंग भरे

 नेक कर्म घनाक्षरी मन में उमंग भरे, दुख ताप सब हरे ,  चारों ओर खुशहाली ,  प्रभु ऐसा वर दो ।।  चेहरे हो खूब खिले ,द्वेष मिटा गले मिले ,  खुशियां हो घर घर , नहीं कोई डर दो ।।  चार दिन सजे रैला , मन मत कर मैला , सत्य धर्म पथ चल,  काम ऐसा कर दो ।।  चाहो तुम  यश पाना, जग पूरे तुम छाना,  नेक राह  चुनकर,  प्रेम खूब गर दो ।। पूनम शुक्ला

सूरज है रश्मि संग

 प्रात वंदन घनाक्षरी सूरज है रश्मि संग ,तेज रखे अंग अंग,  जगमग होती धरा ,  *रूप जैसा  चाहिए*।।  पक्षी गण बोल रहे ,मुख  पुष्प खोल रहे , चारों ओर हरियाली , *जग कैसा चाहिए*।।  बीती अब निशा काली ,कूहके   भ्रमर आली , सात रंग सजे धरा ,  *रंग बैसा चाहिए*।।  प्रातः पूजा थाल लिए ,पुष्प संग सजे दिए ,  भोलेनाथ दर्शन को , *भाव  ऐसा चाहिए* ।। पूनम शुक्ला

शुभ सोमवार आज

 घनाक्षरी शुभ सोमवार  🌹🌸🌺🍁🌻💥 शुभ सोमवार आज , छोड़ो सारे काम काज ,  भोलेनाथ कृपा करो ,  कहे जन मन से ।।  बेलपत्र फूल दीप ,नहीं मोती बिन सीप ,  दया करो नील कंठ , घंटा बजे टन से ।।  शोभा पाए शिव जटा ,देखे गिरी  तेरी छटा ,  पूजा थाल खूब सजा ,  अवनत तन से  ।। लिए गौरा संग संग , शोभा पाएं शीश गंग ,  नहीं कोई मोह माया ,  कहे हम धन से ।। पूनम शुक्ला

गणपति आज बार ,

 घनाक्षरी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 गणपति आज बार ,बेड़ा होगा सब पार , करें जब तेरा ध्यान , *प्रभु सुख दीजिए* ।।  गौरा  आज्ञा नित  माने ,सुत धर्म खूब जाने ,  मोदक पसंद करें ,  *ज्ञान रस पीजिए*।।  रिद्धि सिद्धि शोभा पाएं , गजानन आज आएँ ,  पाएँ जगत आशीष , *काम ऐसा कीजिए* ।। गौरीसुत  दुख हरो ,शिव क्रोध दूर करो , दीप जले  भोग लगे , *कष्ट हर लीजिये* ।। पूनम शुक्ला

शंभू शिव भोलेनाथ

 सावन मनभावन घनाक्षरी शंभू शिव भोलेनाथ ,रखे दीन सब साथ , मेरा बेड़ा पार करो ,  करूं नमन तोहे ।।  हर  दिन शिव  वार  , चढ़े  पत्र फूल  हार , जग हित काम करें ,  आशीष देना मोहे ।।  भस्म तेरे अंग अंग ,रूप देख सब दंग ,  निशा पति रख संग ,  शीश गंग सोहे ।।  प्रभु जग रखो लाज , नहीं कोई दूजा काज ,  गाएँ हम दिन रात , गजल गीत दोहे ।। पूनम शुक्ला

घनाक्षरी रिमझिम

 घनाक्षरी   रिमझिम  गरज गरज कर  ,बरस बरस कर , छूने सावन आँगन , *आतुर है बदली* ।। तरु डाली झूला झूले , पैग बढ़ा नभ छूले ,  मोर नाचे बगियन ,  *गीत गाएँ  कोयली*  ।। पीहरवा मन करे ,  अश्रु लगे अब झरे,  मोहन संग राधा ज्यूँ ,  *खिलखिला हँसली*  ।। इंद्रधनुष रंगों पे , पूनम की तरंगों पे ,  कजरी सुनाती हमें ,  *घन घना बिजली* ।। Poonam shukla

सिंहावलोकन मनहरण घनाक्षरी

 सिंहावलोकन मनहरण घनाक्षरी  आवन लगे हैं रवि ,देख नभ प्यारी छवि, इंद्र देव मान गए,  *मेघा  छावन लगे*! छावन लगे ये मन,खुशी भायी हर जन , ऋतु हरियाली लाये *गीत पावन लगे*!    पावन लगे हैं जिया ,याद अब आई पिया , रिमझिम जल बूँद , *वर्षा सुहावन लगे* । सुहावन लगे रवि ,बाढ़ त्रस्त लोग सभी  , *करे पूनम वंदना , *सुख आवन लगे*!   पूनम शुक्ला

गुरु पूर्णिमा

 गुरु पूर्णिमा  घनाक्षरी 🙏🙏🙏🙏🌸🌹🌺💥🌻🍁🌹🌸🌹🌺🌹🌺🌸🌹 आप जैसा गुरु मिला,मन पुष्प जैसा खिला,  गुरु पूर्णिमा नमन,  दोनों कर जोड़ के ।।  आशीर्वाद प्रभु देना ,पाप सब हर लेना,  मन का तमस मिटा , द्वेष भाव छोड़  के।। करे नित आराधना, नियमित हो साधना, छंद भाव मन जगे, अहंकार तोड़ के ।।   ज्ञान गंगा भर कर,कुमति को हर कर,  सत्य का वरदान दो,  तम घट फोड़ के ।। 🌹🌺🌹🌸🌺🍁🌸🌺🌸🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹 पूनम शुक्ला

दुर्मिळ योग

 दुर्मिळ सवैया रवि सा चमको नभ में सुन लो जुगनू बन के तम दूर करो , महिमा समझो मजबूत बनो सब के पल में हर कष्ट हरो , गर  जीवन में खुश है रहना सच में प्रभु से तुम खूब डरो , जन योग करो तन स्वस्थ रखो चलते रहते सब नाम करो ।। पूनम शुक्ला 12/7/21

ऊषा काल

 घनाक्षरी प्रातः वंदन 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 उषा काल आता देख ,नव सजे रक्त रेख,  निशा निशा पति संग,  *मधुर लजात  हैं* ।। ओस बिंदु फैले धरा ,तरु रंग भूरा हरा, धरा संग मिल कर , *मंद गति जात है*।।  रवि रश्मि चहुँ ओर ,आती हुई नभ भोर , नर सब काम पर , *गगन मुस्कात है* ।। नव पुष्प खिल गए ,पर्ण सब हिल गए , देख कर मृदु रूप, *गीत हम गात है* ।। 🌹💐🥀🌷🌺🌸🏵️🌻 पूनम शुक्ला 2/7/21

नारी

 नमन पटल को 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता  अंतिम दिनांक:- 08/07/2021 वार:-गुरूवार विषय: सीता क्या फिर से बनवास सह पाएगी। द्रौपदी क्या फिर से कृष्ण से कह पाएगी ।। राम को मिला वनवास सीता ने साथ निभाया , पांडव  गए अज्ञातवास द्रौपदी ने हाथ बढ़ाया , पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चलती रही हमेशा  , हर युग ने  नारी को क्यों बार-बार सताया ।। नारी का भाग्य आखिर कब तक पुरुष रचेगा,  हर युग का  धृतराष्ट्र  कभी कुछ नहीं कहेगा,  फिर क्या द्रौपदी फिर से कृष्ण से कह पाएगी , क्या अबला बेचारी कमसिन का खिताब कभी हटेगा ।।  नारी को कमजोर ना समझना अब धधकती चिंगारी है , मान मर्दन करने वालों के लिए रणचंडी अवतारी है , क्या सोचा तुमने सीता क्या फिर से बनवास सह पाएगी , नहीं साथ की उसे जरूरत, स्वयं दुर्गा बन नाम कर जाएगी ।। पूनम शुक्ला बरेली उत्तर प्रदेश

सूर्य

 प्रातः वंदन घनाक्षरी रवि छाया नभ पर,रश्मि लाया जग पर , ताप  तेरा देख कर , *दृष्टि झुक जाती है*।।  गोल तेरा रंग ढंग,उष्ण तेरे अंग अंग ,  कैसे सहे देव धरा,  *नहीं ये बताती है*।।  आया पूर्व चल कर,धीमी नहीं गति कर,  देख तेरा रौद्र रूप , *धरा सकुचाती है*।।  तूने क्या किया धरा,तब कैसे तचे धरा , साची  कहूँ  रवि भाई,  *गर्मी  ये सताती  है*।। पूनम शुक्ला

बुद्ध

 पृथ्वी का सौभाग्य था  जन्मा बालक सिद्धार्थ, ममतामई वात्सल्य की मूर्ति , महामाया जिनकी मात ।।  हर्षित हुए नगरवासी सब,  पाकर अपना राजकुमार,  ढोल नगाड़े बजी बधाई , सुंदर गाया मंगलाचार।।  किया यशोधरा से विवाह,  उम्र  थी केवल 16 साल,  राजमहल में बजी बधाई,  अवतरित हुआ जब नौनिहाल।।  जीवन में दुख का आभास न था  कष्टों से कोई सरोकार न था, राजकुमार सा विलासी जीवन था, सामने कपिलवस्तु का साम्राज्य था ।। पनपी विरक्ति बन्धनों को तोड़ दिया,   बेकसूर मां बेटे को बिलखते छोड़ दिया , विधाता का लिखा भला कौन टाल सका,  दृढ़ निश्चयी चरित्र था सो नाता तोड़ सका ।। ज्ञान की खोज में पहुंचा गया,  राज्य था बिहार स्थान था नया,  वट वृक्ष के नीचे जमाई धुनि,  सिद्धार्थ की ईश्वर ने भी खूब सुनी।।  की तपस्या सात रात और सात दिन , मिला ज्ञान जो न था इतना आसान , बने बुद्ध जिसने सब जाना,  सुखों के मूल में है दुःखो का खजाना ।। खोजना था दुख  था ब्रह्मांड सकल, करना था दुख दूर जो थे दीन दुर्बल , सत्य की खोज में भटका वैरागी , राजपाट ...

तहरीर में कहीं बातें

 अंतरराष्ट्रीय साहित्य मंच दिल्ली  प्रतियोगिता क्रमांक:- 03 दिनांक:- 05/07/2021 विषय:- तहरीर में कहीं बातें क्या मुकम्मल था गुजरे हुए दिन और हसीन रातें,  सर्द फिज़ाओ में भीग जाते  जानम बिनआये ही बरसाते , इश्क में तेरे जालिम भूल गया मैं सारे  रिश्ते नाते,  समझ में नहींआती मुझे *तहरीर में कही बातें*,   इश्क है न जाम साकी  हर जगह तुमको ही  पाते , बेपनाह मोहब्बत में हम गीत ग़ज़ले तन्हा ही गाते ।। स्वरचित एवं मौलिक पूनम शुक्ला बरेली

एक अधूरा सफर

 नमन पटल को 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 01 दिनांक:- 03/07/2021 वार:- शनिवार विषय: एक अधूरा सफर बहुत ख्वाइशें थी मेरी और बहुत अरमान,  मेरी जिंदगी में थे तुझ जैसे साजो सामान ।।  करना चाहती थी पूरा *एक अधूरा सफर* , पर किसी ने होने न दिया मुझे आत्मनिर्भर ।। करने थे समाज राष्ट्र हित बहुत से काम्,  *एक अधूरा सफर* ने बना दिया मुझे नाकाम।। तुम थे नादान कभी, कभी पड़े विफर, और पूरा न करा पाएं, *एक अधूरा सफ़र*। जान जाती तो करती न कभी तुमसे दोस्ती तुम्हारी दोस्ती से लाख अच्छी है उनकी दुश्मनी।। पूनम शुक्ला बरेली उत्तर प्रदेश

प्रातः वंदन

 घनाक्षरी प्रातः वंदन 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 उषा काल आता देख ,नव सजे रक्त रेख,  निशा निशा पति संग,  *मधुर लजात  हैं* ।। ओस बिंदु फैले धरा ,तरु रंग भूरा हरा, धरा संग मिल कर , *मंद गति जात है*।।  रवि रश्मि चहुँ ओर ,आती हुई नभ भोर , नर सब काम पर , *गगन मुस्कात है* ।। नव पुष्प खिल गए ,पर्ण सब हिल गए , देख कर मृदु रूप, *गीत हम गात है* ।। 🌹💐🥀🌷🌺🌸🏵️🌻 पूनम शुक्ला 2/7/21

देव वंदन

 मनहरण घनाक्षरी देव वंदन💥🍁🌺🌹💥🍁🌺🌹💥🍁🌺🌹 प्रभु आप सत्त चित्त ,  ध्यान रखें भक्त हित ,  रहे आप तेज पुंज , जीवन सवाँर के  ।। मेरे आप प्राण श्वास,  रखें बस एक आस , गुन गाए नित हम , आपको पुकार के ।। प्रभु गुरु रहें सम , स्वयं करें दूर तम ,  नहीं आवे कोई दुख,  चरण पखार के ।। अंतर्बल श्रेष्ठ बल , कभी नहीं आता कल,  सुख दुख रहे सम,  जीवन सुधार के।। पूनम शुकला 1/7/21 🙏🌹🌺🍁💥🌸🌻🙏🌹🌺🍁