जगत जननी माते
घनाक्षरी
जगत जननी माते , गुण हर पल गाते ,
बेड़ा पार लगा देना ,
आरती उतारुँ मैं ।।
आदि शक्ति जगदंबा , गृह नित पूजे अम्बा ,
उपकार मान तेरा ,
चरण निहारुँ मैं ।।
बलप्रदा महाबला ,बहुलप्रिया बहुला ,
तेरा शत नाम पूज , जीवन सवारूँ मैं ।।
विष्णु माया भद्रकाली , गीत गाएँ बजा ताली ,
महिषासुरमर्दिनि ,
*तन मन हारूँ मै ।।
Comments
Post a Comment