Posts

Showing posts from January, 2022
 सार छंद  आज सुनाती हूं मैं तुमको,अपने मन की बातें,  कट जाएंगे रस्ते सारे,कुछ हँसते कुछ गाते ।। बचपन बीता खेलों में था ,नहीं फिक्र थी भारी।  मां के आँगन खेला करते, सुंदर थी वह पारी । पढ़ लिख  कर हमको बनना था ,राजा की तब रानी । नौकर चाकर सेवा करते ,नहीं किसी से सानी।।  जब मन होता गगन चूमते ,जब मन होता सागर।  बीच लहर हम खेला करते, रत्नों की ले गागर ।। बचपन जाते बीत गयी वो, बचपन की सब बातें।  राजा रानी किस्से अब हम ,सुन सुनकर मुस्काते ।। परहित जग में काम करो तुम ,अब हमने है ठाना। दया धर्म तो मूल मंत्र है,मर्म सभी है जाना।। पूनम शुक्ला  बहुत सुंदर👌👌 बहुत बधाई आपको👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
 करुण रस मनहरण घनाक्षर🙏🏽  गौतम सन्यासी बन,पहुंचे निर्जन वन , पीपल की छांव तले , आसनी बिछाई रे ।। पुत्र से ना मोह जोड़ा,पत्नी बिलखता छोड़ा , अपराध कौन किया , जान नहीं पायी रे ।। लालन पालन कैसे, बिन पिता करें मात,  यही सोच सोच कर , चेतना गवायी रे।।  देशहित घर त्यागा, तोड़ नाजुक धागा,  यशोधरा संग पुत्र  ,दया नहीं आयी रे। पूनम शुक्ला
 मनहरण घनाक्षरी  हिंद पाक बंटवारा, याद आया दृश्य सारा,  गली-गली मौत घूमे,  दर्द अभी जिंदा है ।। साझी विरासत वाले, हुए दुश्मन हवाले,  झटके से मार डाला,  डालकर फंदा है।।  चारों ओर पड़ा खून,  ग्राम हुए सभी सून,  औरतों की लाशों संग,  काम किया गंदा है।।  बचाने को प्राण सभी,  लौह पथ भागे तभी,  काटा सिर  युवाओं का,  बस यही धंधा है।। पूनम शुक्ला
 मनहरण घनाक्षरी🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽 पड़ोसी की कार देख ,मन में विचार आया,  हमको भी कार लेना , राह बतलाइये।।  झटपट बैंक भागे, बिस्तर तुरत मांगे , खूब हमें अब सोना,  हमें न  जगाइये।। बैंक हमे पैसा देगा,बदले न कुछ  लेगा,  आराम से पहुंचते,  पसर सो जाइए ।। सोने से मिलेगा लोन , इसलिए सोने चले  अब तो हमें आप,  लोन दिलवाइये।। पूनम शुक्ला
 अभिनंदन-2022 🌹🌹🌹🌹🌹🍁🍁🍁🍁🍁🍁 नए साल की खुशियों के संग,  गीत प्रेम के गायेंगे  देख जगत पर कहीं अंधेरा,  मिलकर दीप जलाएंगे।।  प्रथम प्रभात हो नव दिवस का,  बाइस का आगाज हो।  प्रशस्त मार्ग हो जग में सबका, मन में बस यही आज हो। ओमीक्रोन कोरोना को तो , निश्चित दूर भगायेंगे । देख जगत में कहीं अंधेरा,  मिलकर दीप जलाएंगे।।  सुमनों से महके घर आंगन,  खुशियों की सौगात हो।  स्वस्थ रहें परिवार आपका,  अमन चैन  की प्रात हो । नव संकल्पों से प्रेरित हो , राह नयी दिखलायेंगे । देख जगत पर कहीं अंधेरा, मिलकर दीप जलायेंगे ।।  नव वर्ष का उगता सूरज , नूतन सुख मय द्वार हो। पूरे हो सब सपने-अपने , सदा आपका प्यार हो । खूब परिश्रम करके हम तो,   जीवन फूल खिलायेंगे। देख जगत में कहीं अंधेरा, मिलकर दीप जलाएंगे।। पूनम शुक्ला बरेली 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
 मत्तगयंद सवैया नमन मंच 🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽 जन्म मिला इस पावन भू पर,  धन्य हुए अब भाग्य हमारे । मान लिया जग में सबने अब, जीवन उत्तम राम सहारे । पावन निर्मल गंग धरा अब, तारक शोभित अंबर सारे । पूनम की विनती सुन राघव,  अर्पण जीवन पांव पखारे।। पूनम शुक्ला
 मत्तगयंद सवैया 24/12/21 से 30/12/21 वर्ष नया शुभ हो सबको यह, दामन पुष्प भरे अब दाता। मंगल काम उजास भरे दिन, कष्ट सभी अब दूर भगाता। रश्मिरथी रवि संग सजे जग, दर्पण सा मुखड़ा चमकाता।  कर्म करें प्रभु विश्व धरा पर,  पाकर सुन्दर लक्ष्य विधाता।। 2 भाग्य बड़ा सबसे तुम लेकर ,जन्म लिया वसुधा अब जानो।  श्रेष्ठ बनो तुम नेक बनो जग, में रख मानवता तब मानो। कर्म करो नित सुंदर-सुंदर, मानव के गुण को पहचानो । जीवन भी चलता रहता तब, दोष कभी अपने तुम छानो।। 3 स्वस्थ रहे तन औ मन केवल , खेल सभी सिखलाय रहे है  । आज यहाँ जिस को तुम देखत,नाच वहीं नचवाय रहे है । जीवन सुंदर खेल बना अब,देवन आस लगाय रहे है। खेल ख़िलावत है सबको प्रभु ,और कृपा बरसाय रहे है।। पूनम शुक्ला
 कुंडली  हिंदी हिंदी को हम पूजते ,हिंदी है अभिमान । हिंदी को मत भूलिये, रत्नों की यह खान ।। रत्नों की है खान ,लगे सबको अति प्यारी , कह पूनम कविराय ,जगत की राजदुलारी ।। भाषा में सिरमौर, सजे मस्तक में बिंदी। मिश्री का हो स्वाद , धरा पर महके हिंदी।। पूनम शुक्ला
घनाक्षरी अवनि गगन तल, दिन  देखो चला ढल रात घिर आयी अब, लोरी भी सुनाई हूँ। जन्म वृथा जाये नहीं, सुख सभी पायें यहीं, कष्ट सभी हरो प्रभु, याद भी दिलायी हूँ। मन उपकार बसे, जीवन कसौटी कसे, आराध्य साधना कर, गुरु वत्स पायी हूँ। पूस की अंधेरी रात, सूझे नही अब हाथ, दीपक के प्रकाश से, आभा खूब पायी हूँ।। पूनम शुक्ला
सरसी छंद खेल खिलौने लेकर आया, ले लो बिटिया आज। गुड़िया का अब ब्याह रचाओ, और करो तुम राज।।  नहीं चाहिए गुड्डा गुड़िया ,नहीं चाहिए कार,  हमको तो बस पुस्तक ला दो रंग बिरंगी चार।।  पढ़ पढ़ के उस पुस्तक को मैं ,बनूँ बहुत विद्वान।  छोड़ो खेलो की अब बातें, पाना हमको ज्ञान ।। आज सीखना हमको है अब, भाला तीर कमान।  देश सुरक्षित रहे हमारा,चलना सीना तान।।  टूट फूट कर सभी खिलौने, हो जाते बेकार।  नया सबक सिखलाती पुस्तक, पड़े नहीं अब मार।। पूनम शुक्ला
 सरसी छंद सरसी छंद।    15/12/21 प्रभु से पाया जो कुछ तुमने ,मानो तुम उपकार  हाथ जोड़ आभार जताना, हर दिन सौ सौ बार जन्म मिला मानव का तुमको, संग मिले दो हाथ । आकर इस दुनिया में पाया, अपनों का भी साथ।। साथ दिया है जिसने हर पल, किया बहुत उपकार। आभारी तुम रहो हमेशा, अपना सब कुछ वार। मात पिता अरु बंधु जनों का,रखना तुम भी मान । मर्यादा को नहीं छोड़ना,करना मत अपमान।  देश धर्म की बलिवेदी पर, जीवन का दो दान , मातृभूमि की रक्षा खातिर ,कर दो सब कुर्बान। सत्य राह पर चलना सीखो,जीवन हो आसान। बहुत मिला है जिस मालिक से, मानो तुम अहसान।। पूनम शुक्ला 👏👏👏👏
 सरसी छंद गलत मार्ग पर कभी न चलना, पकड़ो सच का हाथ सच्चाई के बल पर सबको,मिलता प्रभु का साथ ।। सत्य झूठ में भेद करो तुम ,करो सत्य पहचान। सत्य हमेशा कड़वा होता,मिलकर सब लो जान।। एक झूठ के बदले में है बोलो झूठ हजार,  पकड़ गए तो सच में यारों मिले नर्क का द्वार ।। सत्य राह पर चलते चलते पकड़ धरम की राह।  पा सकते हो तुम भी मित्रों पाओ जिसकी चाह।। झूठ बोलने की आदत को सच में तुम दो छोड़।  सत्य कसौटी जीवन की है मिथ्या को दो तोड़।।  सत्य मार्ग पर चलने वालों मिलता तुमको मान।  यश उन्नति अरु समृद्धि पाकर सद्गुण की हो खान।। पूनम शुक्ला
घनाक्षरी सुख मय दिन बीते हाथ नहीं कभी रीते , श्रद्धा रखें दिन-रात  प्रभु का सहारा है ।। प्रभु तुम निशिदिन रहते सवेरे शाम , करें नहीं कोई फ़िक्र  भाव ही हमारा है।।  सुख-दुख छाव धूप खूब मिले धन रूप  चिंतन मनन करो  मिटा अंधियारा है।।  प्रभु की संतान जान बंधु लो अपना मान,  पूनम नमन करें,  जग उजियारा है।। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 पूनम शुक्ला
 सरसी छंद जीवन रखो ध्यान तुम अपना खुद ही, जीवन है अनमोल। बाँट सको तो बांटो दुख सुख,दर्द कभी मत घोल।। कटु वचनों का कभी न कहना,रखो नेक व्यवहार। मिल जुल कर तुम रहना सीखो, होगा बेड़ा पार प्रभु ने भेजा तुमको भू पर,रखना उनका  मान। बच्चे सब परमेश्वर के है,इसका रखना ध्यान।। जीवन मे देखे है हमने, सुंदर सुंदर साल।  रात दिवस अरदास यही है, बदले कभी न चाल।। पूनम शुक्ला  सुंदर छंद के लिए आपको बहुत बहुत बधाई👏👏👏👏👏👏👏👏👌👌👌
 6/12/21 से 11/12/21 मुक्तक 1 कभी दो पल यहां बैठो बुने सपने सुनाने दो। खुशी में आज हमको भी यहीं गुलशन सजाने दो। करेंगे आज से  कोशिश  कभी कोई खता ना हो  गुलाबी ठंड में हमको सृजन के गीत गाने दो।। 2 तपस्या का मिला परिणाम मंदिर अब सजाने दो।  धरा के राम भक्तों को कभी अपनी सुनाने दो।  सहे हैं कष्ट धरती पर मगर चुपचाप रहते हैं।  दिवस है आज उनका भी सृजन के गीत गाने दो। 3 नहीं शिकवा हमें है आज इस गुजरे जमाने से मिला है क्या बता दो राज हमको   यूँ सताने से बहुत दिन बाद मिलकर भी नजर क्यूँ फ़ेर ली तुमने  अगर नगमे नहीं गाने बुलाया क्यों बहाने से 4 घटा संगीत छायी  है तरन्नुम के बजाने से  मधुर वीणा बजी है आज साजो  के तराने से फलक से तोड़ तारों  को सजाया प्रेम पथ तुमने  न आना  था अगर तुमको बुलाया क्यों बहाने से 5 झुका कर आज नजरों को पलक को क्यों भिगाते हो बुलाना था नहीं दर पर पता फिर क्यों बताते हो डरे हो क्यों जमाने से अगर देना नहीं धोखा  बनाकर इस तरह दूरी हमें तुम क्यों सताते हो 6 किया था प्रेम बंशी से अधर पर जो सजाते ह...
 दिवस है प्यारा जो है बाल, सदा है सुंदर जिनकी चाल।  देश पर जिनको है अभिमान, रूप है जैसा हो भगवान।। बहुत है भोले दिल के जान, सत्य की राह बनी पहचान। फूल से खिले मधुर मुस्कान, यही हैं अब  बालक नादान।
कुंडलिया काम सदा ऐसा करो,जगत हँसाई होय। नाम तुम्हारा होयगा,पीढ़ी पाछे रोय।। पीढ़ी पाछे रोय, हमे क्या लेना देना। संग देव के घूम,छके हम मीठा छेना।। पूनम की सुन बात,मांग उधार पेट भरो। खूब फुलाओ तोंद, काम सदा ऐसा करो।। पूनम शुक्ला
- माता आराधना  मनहरण घनाक्षरी लाल परिधान सजे ,मंदिर संगीत बजे।  विराजो भवानी माता,  जग रूप  छाये रे।। शैलपुत्री गिरी वासा, नर नारी सब दासा।  चंदन वंदन रोली,  श्रद्धा संग लाए रे।।  मातृशक्ति रूप तेरा, सज  गया द्वार मेरा।  दयावान रूप मयी,  भक्त सब आये रे।।  दुर्गा आराधन कर ,दुख पाप सब हर , जब तप पूजा ध्यान , शांति सुख पाये रे।। पूनम शुक्ला बरेली उत्तर प्रदेश                रचना स्वरचित ©
मनहरण  घनाक्षरी दिवस जीवन चार ,कैसे माने हम हार । दुष्कर्म दमन सदा,  करे हम डट के।।  आशीष आपका मात , कृपा करो प्रभु तात,  समय कीमती अति,   काम करें हट के।।  जन्म लिया नर तन , बने नेक हर जन , व्यर्थ बात छोड़ कर,  दोष दूर घट के।।   योग करो स्वस्थ रहो ,राम-राम नित्य कहो , ध्यान जाप करो सदा,  नहीं मन भट के।। पूनम शुक्ला
 कहानी पुरानी सुनो, कथा रुचिकर गुनो। सावित्री  दुहिता नृप, मुनि वर  लावे रे।। सत्यवान थाबेचारा ,छिन गया राज सारा,  भाग्य देखो खेल करे , सावित्री है   पावे रे ।। वर्ष बीता अभी एक ,काल चक्र रुके नहीं ,  सत्यवान छोड़े जग , लेने यम आवे रे ।। भार्या पीछे हटी नहीं ,शत पुत्र वर लिया,   प्रसन्न बहुत यम,  खुशी-खुशी जावे रे।। पूनम शुक्ला क्रमांक 28
 मनहरण घनाक्षरी बाला देखे नभ रंग ,मोहक मुस्कान संग,  नीला रंग खूब सजे ,  देखें मनुहार के ।।  हृदय हिलोर  मारे ,छाये धरा नभ तारे ,मन भाये ये सावन, गीत है मल्हार के ।।  देख पिय शरमाई  ,प्रेम गीत खूब गायी , आनंद समाये मन , दिन ये त्योहार के ।  जीवन सुखद क्षण ,साक्षी बना कण कण  , गीत राग मन बसे ,  प्रीत उपहार के ।। पूनम शुक्ला
 आदित्य निकल मनहरण घनाक्षरी आदित्य निकल आए ,प्रात गीत मन भाये ,  काम करें स्वयं सभी,  आप अब ठान लो ।। चारों ओर हरियाली ,तरु बैठे हर डाली,   शीतल पवन चले,  सही सब मान लो ।। भोर हुई  आंखें खोल, नीक लगे मीठे बोल,  परिश्रम जीवन का , आनंद है जान लो।।  निशा खूब अलबेली, सारिकाएं अठखेली ,  पूनम प्रभात देख ,  सुमधुर तान लो ।। पूनम शुक्ला
 मनहरण घनाक्षरी अब देखो नई भोर खग वृन्द करे शोर, महके सुन्दर वन -पवन आने लगी।   सब  मिल वृक्ष रोपे मेघ जल धरा सौपे हरियाली चहुंओर  वसुधा पाने लगी।  तब सुन बंशी धुन भक्ति गीत मन सुन देखके वसंत ऋतु कोयल गाने लगी!  कब आये बदरिया ? खाली अब गगरिया , भादों ऋतु सूने सूने पूनम जाने लगी!!
 सरसी छंद  विषय  रक्षाबंधन सावन में जब आती राखी , समय बड़ा अनुकूल। रक्षाबंधन पर्व  मनोरम,  कैसे जाये भूल ।  राखी का रिश्ता है कोमल,आए मन में प्यार  , बदले में सम्मान चाहिए,नहीं हमे उपहार।। रक्षा करना सब बहनों की, जब समय प्रतिकूल।  रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाऊँ भूल । बरस बरस जब कई बीतते, आते तुम हो याद , बहना जब घर तेरे आए ,करे नही फरियाद। अपनी रक्षा खुद भी समझे ,रहे संग त्रिशूल । रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाऊँ भूल ।। अटल प्रेम का धागा है यह, सजे कलाई शान ,  रक्षा सूत्र बँधे हाथों पर,रखना तुम भी मान।  सब पसंद के मेवे लाएँ  ,लाएँ सुंदर फूल , रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाएँ भूल।। कुमकुम चंदन सजा थाल है,आया शुभ दिन खास , रेशम की डोरी मैं  बाँधूँ , जब तुम आओ पास । बना रहे त्योहार मनोरम, सब का है यह मूल,  रक्षाबंधन पर्व मनोरम ,कैसे जाएँ भूल ।। सावन में जब आती राखी , समय बड़ा अनुकूल। रक्षाबंधन पर्व  मनोरम, कैसे जाऊँ भूल ।। पूनम शुक्ला
 सरसी   छंद  गंगा तेरा रूप  विमल है , है अमृत सी धार । तेरे पग को चूमा करते , बाल  वृद्ध नर, नार । उच्च चोटियाँ देख हिमालय , करता है सत्कार।  सीमा पर है सिंधु सुशोभित,  सब का है अधिकार।  प्रहरी बन रक्षा करता है ,  देख शत्रु को आज । भारत के सिर  चमक रहा जो ,  कैसा सुंदर ताज।  जगत  गुरू  के   पथ  पर चलकर ,  आज हमें अभिमान । भारत देश हमारा प्यारा , करते हम सम्मान।। पूनम शुक्ला
 सरसी छंद  विषय  देशभक्ति हमें देश से प्यार बहुत है,करते हम सम्मान। झूला करते फंदे पर हम,रखकर इसका  मान ,   बनकर के तुम सभ्य नागरिक,मानो कभी न हार। मात पिता की सेवा करना,यह भी एक प्रकार। काम समय पर पूरा करना ,होता ना आसान  मिल जुल कर हम रहना सीखे ,अपना देश महान ।।   भूल नहीं  सकते अतीत के,जीवन भर अहसास । देशभक्त की ज्वाला दिल में, जलती रखना पास।।  मिली हमें आजादी कैसे,रखते  हमतो याद । देश हमारा रहे सुरक्षित,करते हम  फरियाद।। विश्व गुरु बनकर यह भारत ,रहा बांटता ज्ञान । आज सभी मिल पूजा करते ,भारत  देश महान ।। पूनम शुक्ला
 सरसी छंद  नशा खोरी सुंदर जीवन है तुम देखो,करते तुम क्यों नाश ।  जहरीली है यह सब चीजें,बने हुए हो  दास ।।  मात-पिता ने पाल पोष कर ,किया कौन अपराध।  तुम पर है वे जान छिड़कते ,करते प्यार अगाध ।।  देकर सिला कौन सा तुमने,दिला दिया है मान।  भारी मन से चले गए वे , दिया सदा ही ज्ञान । कपड़ा रोटी नही पास में  ,रोते बच्चे आज।  छोड़-छाड़ के ऐसा जीवन,करने लग कुछ काज ।। नाली में तुम लोटा करते,पीके खूब शराब , मत कर यूँ बरबाद जवानी ,  सेहत होय खराब।  नहीं करे सरकारी बातें  ,लगे नशे पर रोक । बीमारी से दूर रहे सब ,भला लगे यह लोक।। पूनम शुक्ला