आवन लगे हैं रवि
सिंहावलोकन मनहरण घनाक्षरी
आवन लगे हैं रवि ,देख नभ प्यारी छवि,
इंद्र देव मान गए,
*मेघा छावन लगे*!
छावन लगे ये मन,खुशी भायी हर जन ,
ऋतु हरियाली लाये
*गीत पावन लगे*!
पावन लगे हैं जिया ,याद अब आई पिया ,
रिमझिम जल बूँद ,
*वर्षा सुहावन लगे* ।
सुहावन लगे रवि ,बाढ़ त्रस्त लोग सभी ,
*करे पूनम वंदना ,
*सुख आवन लगे*!
पूनम शुक्ला
Comments
Post a Comment