सार छंद। बाल साहित्य । भारत के हैं बालवीर हम,
सार छंद। बाल साहित्य
।
भारत के हैं बालवीर हम, ताकत दिखलाएंगे।
वीर सिपाही कथा देश की , आके बतलायेंगे ।।
*आज विश्व मे धूम मचाने ,की हमने है ठानी ।
*कायर हमको जो समझे वह,उसकी है नादानी ।।
राम हमीं थे कृष्ण हमीं थे,मर्यादा जानी थी ।
वीर शिवा की साहस गाथा, जानी पहचानी थी।।
सूरज चांद और तारे बनकर, नभ मे हम चमकेंगे ,
वीर प्रताप भरत बैरागी ,जग पर अब विचरेंगें ।।
मात पिता की सेवा करना , है कर्तव्य हमारा,
*दूर देश में रच बस जाना,हमको नही गवाँरा*।।
तक्षशिला नालंदा गौरव,हमको अब लाना है,
भारत माँ के है सपूत हम, परचम फहराना है।।
पूनम शुक्ला
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