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Showing posts from June, 2021

प्रातः वंदन

 प्रातः वंदन घनाक्षरी प्यारा तेरा कृष्ण रूप ,जपे नित सुर भूप ,  कर्म रत जग सारा  , *बात यही मान के*।।  नित नई लीला रचे ,दूध दही खूब चखे ,  ग्वाल बाल सब संग  , *कर्म भगवान के*।।  राधा संग क्रीड़ा करें ,नाग राज वश करें , सुख चैन सब  पाएँ , *बंशी धुन गान के*  ।।  छोड़ सब मोह माया तज धूलि बृज छाया ,  धर्म युद्ध पार्थ रत  , *सत्य सब जान के* ।। पूनम शुक्ला

सियाराम

 सियाराम घनाक्षरी 🍁🌺🌹🌺🍁🌸🍁🌺🌺🌺🌹🍁💥💥💥💥💥 हरे राम हरे राम,  जपो नित  नई शाम , बेड़ा पार करें प्रभु,  सब काम छोड़ के ।।  राम तेरी लीला न्यारी,  संग सजे सिया प्यारी, भक्त जन शोभा पाते , दोनों कर जोड़ के।।  मात-पिता आज्ञा माने , लगे ऋषि संग जाने,  मोक्ष पाए दैत्य जब, बंधनों को तोड़ के ।। वन बीच कष्ट सहा, दुख सिया साथ रहा, दूजा अर्थ सिया शक्ति ,  चली धारा मोड़ के।। 💥🍁🌹🌸🌻🌸🌹🍁🌺 पूनम शुक्ला 30/6/21 समीक्षार्थ🙏🙏🙏🙏🙏🙏

प्रातः वंदन

 घनाक्षरी प्रात काल 🌸🌺🍁🌸🌺🌹🌹🌺🌸🍁 निशा बीती अब जाग ,खेले कूदे दौड़ भाग,  कर्म पथ शुरू करें,  *मुख देव नाम से* ।। (शाम जंच नहीं रहा)    राज  सुख छोड़ कर ,भ्राता मुख मोड़ कर ,  मातृ आज्ञा मान लेना,  *सीख प्रभु राम से* ।।  प्रात देख मृग खग ,रखे धीरे धीरे पग ,  रात अब ढल गई , *सब जाएँ काम से* ।। खुश होते जीव सब,नाचे रश्मि धरा जब,  मांगे देश प्रेम फिर,  *शिव  सुख धाम से* ।। 🌸🌺🌸🌺🌸🍁🌺🌸💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼💃🏼 पूनम शुक्ला 28/6/21

राधेश्याम

 राधेश्याम छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!* [8,8,8,7 पर यति, वर्णिक छन्द,कुल 124 अक्षर,चार चरण::पदांत-गुरु!]  🌞🕊️🌳🕊️🌳🕊️🌳🕊️🌳 छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!* राधे श्याम तेरी लीला नत सारा जहां यहॉं ,  तेरा रूप जग प्यारा, हम बलि जाएँ रे ।। सारी बिधि देखा जाँचा, नहीं कोई दूजा साँचा ,  तेरा संग पाते जब  सब सुख आएँ रे।।  बंशी धुन  सुन सुन ,मद मस्त होते सब , तुझे मान ईश सब , जन गीत गाएँ रे ।। ग्वाल बाल सखा संग,देखे सारे रूप रंग , देख कर प्रेम रूप , नेत्र सुख पाएँ रे।। पूनम शुक्ला 27/6/21 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

सफ़र

 छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!* [8,8,8,7 पर यति चले थे सफर पर  न जाने कुछ सोचा था  भागम भाग सी दौड़  *स्वप्न कहीं खो गए* ।।  पकड़ कर चले थे , तुम साथ निभाने को , करके मोहब्बत यूं , *हम तुम्हारे हो गए*।। सोचा ना कुछ समझा,  आंख मूंद चल दिए,  समझ कर आज का , *चैन से हम सो गए*। धोखे और फ़रेब से, लूट कर मेरा दिल,  ऐसी क्या मजबूरी , *बिन वर्षा रो गए **।। पूनम शुक्ला 24/6/21

सूरज

 सूरज छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!* नभ पर रवि छाया , साथ ताप धूप लाया,  लाल रंग सूर्य सजे,  *निशा गई हार के*।।  आग फैले चहु ओर,  लाल रंग करे शोर , धरा तुम  धैर्य धारो, *जग पर वार के* ।। गोल गोल तुम सजे,  कर खूब खूब मजे , तम को दूर कर , *गया सृष्टि पार के* ।। रह नहीं पाया जग,  पेड़-पौधे जीव खग,  तुम सर्व शक्ति मान , *बाल वृद्ध नार के* ।। पूनम शुक्ला 25/6/21

सवेरा

 मनहरण घनाक्षरी सवेरा नव भोर नव दिन , माला जपु गिन गिन,  रवि सा प्रकाश लिए , *सुखद प्रवास के* ।।  योग करो स्वस्थ रहो , प्रभु गीत नित गहो ,  जीवन आनंद मानो,  *मधुर सुवास के*।।  दिन बहुत खास कर ,  देवो से ही आस कर ,  सुंदर सत्य है मानो , *अटल विश्वास के* ।। कोकिल की कूक प्यारी , पपीहे की टेर न्यारी ,  जीवो पर दया कर,  *जीवन निवास के*।। पूनम शुक्ला 21/6/21

सवेरा

 मनहरण घनाक्षरी सवेरा प्रात काल की बेला में , धूप छांव के खेला में, खग पंछी उड़े व्योम, *उड़े छुए नभ को* ।।   आरती थाल सजाए,  सुमधुर गान गाए,  मन मंदिर दीपक , *पूजे तेरे संग को*  ।। भक्ति में ही जीवन है , कांटो खिले सुमन है , रखें आस्था ईश्वर पे , *और पूजे  गंग को*।। सजे भिन्न भिन्न पुष्प  ,  जीवन के छांव धूप, देखा करते हमेशा,  *तेरे कई रंग को*।। पूनम शुक्ला 23/6/21

प्रकृति

 मनहरण घनाक्षरी प्रकृति अवगुण तज कर  गुण सब धर सर ,  प्रभु के गुणगान को,  *अखियाँ तरसती* ।।  सुंदर विचार धरे , नित नए काम करें ,  जीवन आयाम पर,  *कामना बलवती* ।। सूरज  सा तेज रख ,  माया का बंधन तज,  धवल परिधान में,  *चंद्रिका विचरती* ।। धन्य धान्य पूर्ण धरा , अमृत कलश भरा,  लहलहाती भूमि पे ,  *फसलें सरसती* ।। पूनम शुक्ला 22/6/21

सूरज

 सूरज छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!* नभ पर रवि छाया , साथ ताप धूप लाया,  लाल रंग सूर्य सजे,  *निशा गई हार के*।।  आग फैले चहु ओर,  लाल रंग करे शोर , धरा तुम  धैर्य धारो, *जग पर वार के* ।। गोल गोल तुम सजे,  कर खूब खूब मजे , तम को दूर कर , *गया सृष्टि पार के* ।। रह नहीं पाया जग,  पेड़-पौधे जीव खग,  तुम सर्व शक्ति मान , *बाल वृद्ध नार के* ।। 🙏🙏🙏

पुष्प

 *पुष्प* छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!* [8,8,8,7 पर यति, वर्णिक छन्द,कुल 124 अक्षर,चार चरण::पदांत-गुरु!]  🌞🕊️🌳🕊️🌳🕊️🌳🕊️🌳 लाल नीले पीले फूल,कभीनही चुभे शूल , चाहे जैसे देखे मन , शुभ दिन साल के* ।। लगे  नहीं कोई चोट ,मन नहीं कछु खोट , चाहे हम चढ़े गंग,  *चाहे देव भाल के* ।। बाल मन प्यारो लागे,सारो जग न्यारो लागे,  बाल भी है पुष्प सम , *देखो हर काल के* ।।  दिन भर खूब खिले ,रात सब नहीं  हिले , रात रानी खूब फले ,  *सजे नदी नाल के* ।। --पूनम शुक्ला 26/6/21 👩‍👩‍👧‍👦👨‍👨‍👧‍👧👨‍👨‍👦‍👦👨‍👨‍👧‍👦👨‍👨‍👧‍👦👨‍👨‍👧👨‍👨‍👧👨‍👨‍👦👩‍👩‍👧‍👧 शुभ प्रभात!!

बीती ताहि बिसारिए आगे की सुध लेह

 *बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध  लेह*  जो भी परिस्थितियां मिले, कांटे चुभे, कलियां खिलें ।  हारे नहीं इंसान, है संदेश जीव का यही ।" किसी कवि के कथन का आशय यही है कि हमे कभी हिम्मत नही हारनी चाहिए ।   पूरे आत्मविश्वास से वर्तमान का आनंद लेना चाहिए । आत्मविश्वास सभी सुखों के मूल में विराजमान है जिस व्यक्ति ने स्वयं पर विजय प्राप्त कर ली , उसे दुनिया का कोई भी व्यक्ति परास्त नहीं कर सकता है । हमें अपने अंदर ऐसा विश्वास जागृत करना होगा तभी हम श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ इंसान बन पाएंगे । पर दुर्भाग्य ! हम हमेशा एक अवसाद में जीते हैं ,कोई एक  कमी अपने अंदर तलाश लेते हैं परिणाम स्वरूप निराशा और  आलस्य हमें चारों ओर से घेर लेता है ,और हमारा शारीरिक और मानसिक पतन होना प्रारंभ हो जाता है ।जो बीत गया उसको याद करने से क्या लाभ  । *बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध  लेह* । आत्मविश्वास का शाब्दिक अर्थ है स्वयं पर विश्वास एवं नियंत्रण करना । अपने सभी कार्यों को बिना डर के पूरे साहस व  हिम्मत से पूरा  करना । अगर हम अपने जीवन में पूर्णतया सफल होना चा...

सफलता ही मूल मंत्र

 सफलता का मूल मंत्र आजकल इस वैश्विक महामारी कोरोना में जब विश्व में चारों ओर दुख और तनाव का वातावरण व्याप्त है तब हम परिस्थितियों से कैसे मुकाबला करें , जीवन मे सफलता कैसे प्राप्त करें ।अपना साहस और आत्मविश्वास कैसे बनायें रखे ,यह बहुत ही विचारणीय प्रश्न है । मान-सम्मान,सुख-समृद्धि ,वैभव ,सफलता कौन पाना नही चाहता है ।अर्थात सभी पाना चाहते है ,जरूरत है तो इसे पाने के लिए आत्मविश्वास की । जो भी परिस्थितियां मिले, कांटे चुभे, कलियां खिलें ।  हारे नहीं इंसान, है संदेश जीव का यही ।" किसी कवि के कथन का आशय यही है कि हमे कभी हिम्मत नही हारनी चाहिए ।   सफलता पाने के लिए पूरे आत्मविश्वास से वर्तमान का आनंद लेना चाहिए ।आत्मविश्वास सभी सुखों के मूल में विराजमान है  । जिस व्यक्ति ने स्वयं पर विजय प्राप्त कर ली , उसे दुनिया का कोई भी व्यक्ति परास्त नहीं कर सकता है । हमें अपने अंदर ऐसा विश्वास जागृत करना होगा तभी हम श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ इंसान बन पाएंगे । पर दुर्भाग्य ! हम हमेशा एक अवसाद में जीते हैं ,कोई एक  कमी अपने अंदर तलाश लेते हैं परिणाम स्वरूप निराशा और  आलस...

सौम्य सवेरा

 *सौम्य सवेरा!* छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!* [8,8,8,7 पर यति, वर्णिक छन्द,कुल 124 अक्षर,चार चरण::पदांत-गुरु!]  🌞🕊️🌳🕊️🌳🕊️🌳🕊️🌳 आयी शुभ नव भोर,पँछी कूके चहुँ ओर, वेला नव प्रभात की, *खुशियाँ बरसती* ऋषि मुनि जाग गये, चुन चुन फूल नये, ईश आराधन करें, *खुश्बू महकती* मन का तमस मिटा,रवि का प्रकाश हटा, घन घोर घटा छायी, *चपला गरजती* धरती की को कोख चीर, हरे भरे खेत हीर, देखते मन मुदित, *कोकिल चहकती* अवगुण तज कर,गुण सब धर सर, प्रभु के गुणगान को, *अखियाँ तरसती* -  गंगा दशहरा, 21/6/21 🌳🕊️🌳🕊️🌳🕊️🌳🕊️🌳 शुभ प्रभात!!प्रथम मन हरण घनाक्षरी
 पिता पकड़ कर हाथ माँ ने , कभी सिखाया था हमें चलना , बताया पिता ने हर पल , कैसे गिरकर है संभलना । कैसे  भी  हालात  हो,  बिन   मांगे   सब पाया , गांठ बांध ली सीख उनकी,  हर स्थिति का करो सामना।।  तपते मरू में  तृप्त करता , जो पावन समीर था,  बंजर भूमि में स्वर्ण उगाता , ये अमृत सा नीर था। सुरक्षित रखता अपना कुटुंब,  तूफानों को चीर कर, अपना लहू पसीना  देकर ,  लेता घर की पीर  हर ।। आप थे  तो फिक्र से , न था  कोई लेना और देना , हम खुद में थे मगन, काम था केवल सपने सँजोना । जिंदगी जिंदादिली का नाम है , यही कहते थे आप हरदम, मिले  पिता रूप में सर्वदा, प्रभु से बस यही कामना।।  गर  बचपन में संस्कारों का,  बीजारोपण किया मात ने ,  समाज के हर वर्ग के साथ , चलना सिखाया था तात ने ।  आई लाख मुसीबत  जीवन में,  नहीं जाना कभी थमना , कहना था सही,अपने बोएँ का,  जाना पड़ेगा खुद ही काटने ।। माँ  का कोमल स्पर्श,  पिता की खुरदुरी हथेलियाँ ,  कैसे करते थे ख्वाहि...

सफलता ही मूल मंत्र

 सफलता का मूल मंत्र आजकल इस वैश्विक महामारी कोरोना में जब विश्व में चारों ओर दुख और तनाव का वातावरण व्याप्त है तब हम परिस्थितियों से कैसे मुकाबला करें , जीवन मे सफलता कैसे प्राप्त करें ।अपना साहस और आत्मविश्वास कैसे बनायें रखे ,यह बहुत ही विचारणीय प्रश्न है । मान-सम्मान,सुख-समृद्धि ,वैभव ,सफलता कौन पाना नही चाहता है ।अर्थात सभी पाना चाहते है ,जरूरत है तो इसे पाने के लिए आत्मविश्वास की । जो भी परिस्थितियां मिले, कांटे चुभे, कलियां खिलें ।  हारे नहीं इंसान, है संदेश जीव का यही ।" किसी कवि के कथन का आशय यही है कि हमे कभी हिम्मत नही हारनी चाहिए ।   सफलता पाने के लिए पूरे आत्मविश्वास से वर्तमान का आनंद लेना चाहिए ।आत्मविश्वास सभी सुखों के मूल में विराजमान है  । जिस व्यक्ति ने स्वयं पर विजय प्राप्त कर ली , उसे दुनिया का कोई भी व्यक्ति परास्त नहीं कर सकता है । हमें अपने अंदर ऐसा विश्वास जागृत करना होगा तभी हम श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ इंसान बन पाएंगे । पर दुर्भाग्य ! हम हमेशा एक अवसाद में जीते हैं ,कोई एक  कमी अपने अंदर तलाश लेते हैं परिणाम स्वरूप निराशा और  आलस...

पुस्तकें

 पुस्तक मन हो व्यथित ,                      खोले पृष्ठ ,                                   हो संतृप्त ,                                मुश्किलो का                                         हो समाधान ,                                         अनवरत ।।      निष्कलंक,                                जीवन का ,                            सिखाती सलीका ,          ...

तोरण

 तोरण फूलन की तोरण हो,औऱ सुंदर सो थार, तोरण को डार के,लागो नीको द्वार । उत्सवन पर डारो  या डारो  तीज त्योहार, आवे  सुख  समृद्धि ,  बांटों नेक उपहार। हम कहे विश्वास से, तोरण ऐसो होय, जैसे इत्र गुलाब को, मन महकाये तोय। द्वारन पर  डारो या  डारो पूजा  धोरे    ,  उम्मीदन को दिया जलावे, जीवन में तोरे । देवन को भावे हैं ,तोरण सतरंगी , खुशियन में गले मिल, जश्न मनाएं संगी। घर को सजाए खातिर, करें एको प्रयोग,  लछमी होये प्रसन्न, जब आवे  संजोग।।  दुख ले के खुशियाँ बाटों, दीनन के जिय में, मत करो मन उदास,तोरण सजाओं हिय में ।।                    पूनम शुक्ला

प्रकृति

 विश्व पर्यावरण दिवस की सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं ।जीवन के लिए हमारे पास एकमात्र यही ग्रह है, यह हमारा घर है और हम सभी इसकी प्राकृतिक सुन्दरता को सदैव के लिए बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है. विश्व पर्यावरण दिवस एक अभियान है, जो हर साल 5 जून को मनाया जाता है ।  इसी संदर्भ में मेरे मन के उद्गार ..... प्रकृति   हे पालनहारी, हे जीवनदायिनी , हे  सृष्टि तुझे शत शत नमन ।   तेरी ही सुंदर रंग रूप सब ,     गगन, भूमि ,अनल, नीर पवन ।।  तेरा अद्भुत सौंदर्य हैं देखा , देखा तेरा बारह  मासा। हिमाच्छादित  पर्वत देखा , देखा  उजला रूप सुबासा  ।। तेरी ही  छाती को चीरा, उपजा  कर  हमने जल अन्न । हरी-भरी  फसलें  हैं  हीरा ,  देखकर होते हम प्रसन्न।।  आता जब मधुमय बसंत,  शीत ऋतु का होता अंत । खिलने लगते आमों पर बौर,  शुरू हो जाता उत्सवों का दौर ।। देखकर  तेरा  रौद्र स्वरूप , अतिशय बारिश भयंकर धूप। बाढ़ सूखा और हिलती धरती , सुनामी में  दिखता तेरा रूप ।। वनसंपदा को यदि है बचाना , कोख स...

हमे गर्व है हम शिक्षक है

 क्या है अवसाद इस जीवन में, जो बन पाए अभियंता  या चिकित्सक , क्या किसी से कम है , जो बने हम एक शिक्षक।।  क्या इससे अच्छा है , अन्य रोजगार , क्या बन के शिक्षक , जीवन ना हुआ कामगार , क्या कुछ ना बने , तो बने हैं शिक्षक ? क्या इससे अच्छा हैं, कोई और  रोजगार , क्या बनके शिक्षक , जीवन न हुआ कामगार । तो क्या कुछ न बने , तो बने हैं शिक्षक , तो हज़ारों नौनिहालों के , क्यों बने हो रक्षक ।। बस यही  मानसिकता को  बदलना है , इसी अवसाद को मिटाना है। जीवन को सरल सुखद,  सुगम बनाना है , जीवन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना है।।  प्रभात में लाल नीले पीले,  परिवेश में सुंदर सजीले , से फूलों को देखना , उनके हंसते रोते चेहरों में, मुस्कुराहट तलाशना । तमाम झमेलों को भूल  प्यार पाना ,आशीर्वाद देना ।। इनकी खिलखिलाते चेहरे, अंतरात्मा तक,  रोमांचित नहीं कर जाते,  ईश्वर का दिया बेहतरीन उपहार, है इन नौनिहालों का जीवन, अभिभावकों का भविष्य  किसी सौगात से कम है ।। जो हमें ना हासिल हुआ,  फर्ज हमारा , उनको हासिल कराना ,  सच है हकीकत जानो , इनके दिल से...

पानी

 इस वैश्विक महामारी में सबसे अधिक प्रभावित किया है तो केवल प्राण वायु की कमी ने । इससे पहले क्या हमने सोचा था कि हमें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ेगा शायद नहीं ।आज दुनिया में ऑक्सीजन की तरह पानी की भी स्थिति होती जा रही है पानी की बर्बादी को देखकर मन बहुत व्यथित होता है आज इसी पानी पर एक कविता प्रस्तुत है । पानी क्या मेरे बिन ,  तुम रह पाओगे ? ख्यालों और  ख्वाबों में मुझ को ही पाओगे।।  बता देता हूं, कि मैं कौन  , मैं पानी  हूँ। सुनना चाहते हो मेरी कहानी,   मेरी जुबानी,  सुनके मेरी कहानी , बरसेगा आँख से पानी,  क्यों व्यर्थ बहाते हो मुझको,  सूख जाएगी धरा , पौधा भी क्या रह पायेगा हरा , तो क्या रह  पायेगी ,  मेरी तेरी जिंदगानी ।  कह गये सारे ज्ञानी, मैं हूँ बहता हुआ पानी।।  तो क्या हुआ, अगर मै  रंगहीन , गंधहीन,  स्वाद विहीन, पर फिर भी क्या रह सकते हो , मेरे बिना एक पल भी,  हर रूप में पड़ेगी,  तुमको मेरी जरूरत,  समंदर का नीला रंग हो, या तालाबों का मटमैला , बर्फ  स...

मेरे पापा

 मेरे पापा हारना  कहते किसे , कभी जाना नहीं, प्रतिकूल परिस्थिति में भी, रहे अनुकूल, वह मेरे पापा थे ।। भीषण झंझावातों में  डगमगाए ना जिनके कदम  शिरीष के पुष्प से वनरागी, वह मेरे पापा थे ।। तोड़कर चट्टानों को वृक्ष बन, तने रहे जो सदा , सागर से धीर गंभीर , वह मेरे पापा थे ।। जो थे मेरे साथ , थे इरादों के पक्के , सूरज की किरणों से दमकते, वह मेरे पापा थे ।। मां के साथ खुद की भी, खुशियों की परवाह  न की, लुटा कर  सारी खुशियां हम पर,  वह मेरे पापा थे ।। लेकर ईटों की दीवारों को , प्यारा घर बना दिया, पर कुछ अनमने से चल दिए, वह मेरे पापा थे।। सब की भलाई में जीवन,  समर्पण करने वाले , अपने लिए कभी न सोचा , ऐसे मेरे पापा थे।। ताउम्र बनाते रहे, बिगड़े हुए रिश्ते, रिश्तों से ही खंजर खाने वाले, वह मेरे पापा थे।।  कुछ पूर्व जन्मों का कष्ट , भोगा था इस तन से, इस जन्म में चींटी भी ना मारने वाले ऐसे मेरे पापा थे ।। श्राप की तरह गुजारे  अंत के चंद महीने , रिश्तो को परख गये, वह मेरे पापा थे।।

ऑनलाइन शिक्षण और शिक्षकों की भूमिका

 *ऑनलाइन शिक्षण में शिक्षकों की भूमिका* शिक्षक वह मोमबत्ती के समान है जो स्वयं जलकर अपने ज्ञान रूपी प्रकाश से छात्र के जीवन का अज्ञान रूपी अंधकार  दूर करता है। समाज में शिक्षक को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया है। भारतीय संस्कृति में शिक्षक को हमेशा आदर की दृष्टि से देखा जाता है। वेदों में भी *आचार्य देवो भव* अर्थात आचार्य देवता के समान है ऐसा कहा गया है । किसी भी युग में शिक्षक के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है क्योंकि शिक्षक  ही छात्र  का मित्र और पथ प्रदर्शक बनकर उसको विवेकी और ज्ञानी बनाता है। पुरातन काल से लेकर आज तक शिक्षक  की भूमिका  महत्वपूर्ण  बनी हुई है । शिक्षक ज्ञान ,समृद्धि और प्रकाश का एक पुंज होता है । वह चाहता है कि उसके प्रत्येक विद्यार्थी  का अपना अस्तित्व हो ।शिक्षा का मूल उद्देश्य छात्र के जीवन को सशक्त बनाना और परिवार समाज राष्ट्र के लिए एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है। इसमें छात्र और अध्यापक की भूमिका सर्वाधिक प्रभावी सिद्ध हो रही है । अगर वर्तमान समय की बात की जाएँ तो इस समय पूरा विश्व कोरोना नामक वैश्विक महामारी से जूझ रहा है ।स...