नया प्राण नहीं जान

 घनाक्षरी

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नया प्राण नहीं जान ,देख ध्वजा बड़े शान ,

 फहरा तिरंगा बन,

 अरमान देश का।।


 हंस कर झूल गए ,कष्ट सब भूल गए ,

माता भारत  सपूत ,

अभिमान देश का ।।


 खुशी आज जन-जन ,जश्न मना हर मन ,

 आजादी मशाल जले ,

मान  है देश का ।।


शक्ति दिखे केसरिया, धैर्य धारण धवल ,

हैअमृत महोत्सव ,

पहचान  देश का।।


पूनम शुक्ला

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