सरसी छंद विषय श्रृंगार रूप मोहिनी

 सरसी छंद

विषय श्रृंगार



रूप मोहिनी सी दिखती हो,

 बोलूँ क्या मैं आज .।

देखूं तेरी सुंदरता मैं,

 आती तुझ को लाज ।।


सागर जैसी आँखों वाली ,

 रंग सुहावन नील,

 रूपमती तू कुछ ना  कहना ,

बैठ किनारे झील ।।


अरे प्रेम से बैठ किनारे ,

रहे हमेशा साथ ।

 केवल तेरा रूप निहारुँ ,

 ले हाथों में हाथ।।


 भिन्न भिन्न भी मौसम आए,

 गर्मी बरखा शीत ,

जग से हमको क्या लेना हैं ,

 गाएँ हम तो  गीत ।।


कोयल जैसी बोली तेरी

 नैनों में है नूर ,

सुर्ख गुलाबी अधर चमकते ,

 मद में हैं  हम चूर ।।


पूनम शुक्ला

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