*सुंदर प्यारा देश हमारा* गणतंत्र दिवस के उत्सव को, मिल स्वागत की ठानी है। प्रकृति करे श्रृंगार धरा का, पहन चुनरिया धानी है । दिवस सुनहरा लोकतंत्र का, गणतंत्र हमारा आया है । पूर्ण हुआ स्वराज्य का सपना, जन्म नया अब पाया है।। रज कण में शोभित शौर्य देख, हम गीत विजय के गाते हैं। पावस है अब दिवस सुनहरे, उज्जवल सारी राते हैं ।। भारत की मिट्टी है पावन, हम सब शीश झुकाते हैं, बलिदानी वीरों की गाथा, आज सभी मिल गाते हैं।। क्या करना अब क्या ना करना, संविधान हमे सिखलाता है। वीरों का बलिदान दिवस शुभ , याद हमें अब आता है ।। बांध कफन को सिर पर उसने माँ को गले लगाया है। देख तिरंगा बाना पहने , वीर युद्ध से आया है।। मातृभूमि की रक्षा खातिर सीने पर गोली खाता है। नमन हमारा उस जवान को , जो देश हित मिट जाता है ।। धरती पर अधिकार हमारा , नीला अंबर मेरा है । नमन सभी का मातृभूमि को, देवों का अब डेरा है। उठो धरा के वीरो जागो, भुजबल को दिखलाना है। उड़ा शत्रु के होश युद्ध में, माटी तिलक लगाना है। धर्म समरसता का पाठ स...
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Showing posts from February, 2022
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मनहरण घनाक्षरी विषय सैनिक सीमा पर खड़े डटे, देखो नही पीछे हटे, सैनिक महान आप, आपको नमन है।। बलिदान देश पर,किया आप शान संग, शत्रु ललकार कर, करते दमन है।। मातृभूमि रखवारे, जगत नयन प्यारे, शूरवीर शौर्यता ही आप से चमन है।। हौसले बुलंद हुए, धरा नभ खूब छुए, वतन की रक्षा हेतु जपते अमन है।। पूनम शुक्ला बरेली
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श्रृंगार छंद एक थे सेठ बड़े चालाक, बड़े से नेत्र तनिक सी नाक। किलो के कान पेट तंदूर, खौफ ना कोई मद में चूर।। अन्न को खाकर खुलती आँख, चमकती फूलों की हो पाँख। यही बस करता सोच विचार, कहाँ से रुपये मिले हजार ।। नगर में घूमा करते चोर , सदन में नेता करते शोर । धनी बन घूमे मूँछे ऐठ, बोलकर कहते सब है सेठ।। सेठ का बिगड़ गया है लाल, देखकर हाल हुआ बेहाल। सेठ ने मारे हैं दो हाथ , लाल ने छोड़ दिया अब साथ ।। भीख भी मिलना ना आसान, करो ना रोटी का अपमान छोड़कर गलत काम को आज, किया अब अपने दिल पर राज।। पूनम शुक्ला
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मत्तगयंद सवैया 1 स्वस्थ रहे तन औ मन केवल , खेल सभी सिखलाय रहे है । आज यहाँ जिस को तुम देखत,नाच वहीं नचवाय रहे है । जीवन सुंदर खेल बना अब,देवन आस लगाय रहे है। खेल ख़िलावत है सबको प्रभु ,और कृपा बरसाय रहे है।। 2 भाग्य बड़ा सबसे तुम लेकर ,जन्म लिया वसुधा अब जानो। श्रेष्ठ बनो तुम नेक बनो जग, में रख मानवता तब मानो। कर्म करो नित सुंदर-सुंदर, मानव के गुण को पहचानो । जीवन भी चलता रहता तब, दोष कभी अपने तुम छानो।। 3 वर्ष नया शुभ हो सबको यह,दामन पुष्प भरे अब दाता। मंगल काम उजास भरे दिन,कष्ट सभी अब दूर भगाता। रश्मिरथी रवि संग सजे जग,दर्पण सा मुखड़ा चमकाता। कर्म करें प्रभु विश्व धरा पर,पाकर सुन्दर लक्ष्य विधाता।। 4 मत्तगयंद सवैय जन्म मिला इस पावन भू पर,धन्य हुए अब भाग्य हमारे । मान लिया जग में सबने अब,जीवन उत्तम राम सहारे । पावन निर्मल गंग धरा अब,तारक शोभित अंबर सारे । पूनम की विनती सुन राघव,अर्पण जीवन पांव पखारे।। 5
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भुजंग प्रयात छंद विधाता गज़ब की कला है तुम्हारी, गढ़ी नार जग में बनी स्रष्टि सारी। किया काम सुन्दर बना देवि नारी, नमन है विधाता गगन से उतारी।। दिया प्यार नारी सभी को जहॉं पर, तभी पूजनीया बहुत है यहॉं पर। बनी झील आँखे नजारा सुहाना, जरा पास बैठो नजर तो मिलाना।। हटा केश अपने दिखा दो खजाना, नहीं तुम छिपाना नहीं तुम सताना।। *निशा में निहारूं, भले बंद आँखे*, लिया चूम मैंने अधर मान पाँखें।। सजे माथ बिंदी सजे बाल गजरा, सजे हाथ चूड़ी सजे आँख कजरा। सजे पांव पायल सजे ओठ लाली, सजे नाक नथनी करो तुम उजाली।। 2 तिरंगा खिलेंगे सुमन अब सदा ही चमन में, मिली है अजादी सभी को वतन में। कटाना पड़े शीश पीछे हटे ना, करे प्रार्थना यूँ कभी हम बँटे ना।। दिया सौप भारत करोगे हिफाजत, करोगे नमन सुन सभी की शहादत। *उठो नौनिहालों समय है तुम्हारा*, *संभालो तिरंगा लगे खूब प्यारा*।। 3 भुजंग प्रयात छंद झुकेगा तिरंगा कभी भी न प्यारे, लगा ले भले जोर मिल श्वेत सारे। मिटे देश खातिर शहीदों नमन है, बनाया तुम्हीं ने वतन को चमन है लहूँ को बहाकर तिरंगा मिला है, तभी देश भक्तों चमन यह खिला है। रहे याद ...