कुहू करे आम बौर

 उत्कृष्ट

  घनाक्षरी

कुहू करे आम बौर ,मन भाये करे शोर ,

मीठी वाणी बोल कर ,

हमको बुलाती हो  ।


कोयल कूहके संग ,पक्षी भिन्न भिन्न रंग ,

वसंत उमंग जब,

गीत मृदु गाती हो ।।


इधर उधर डोले ,कम रवि आग गोले ,

गीत सुने आम जन ,

हृदय  लुभाती हो ।।


कागा पीहू एक रंग ,रहते कभी नही संग ,

गुड़ जैसी बोली *तुम* ,

किधरसे लाती हो??? 


पूनम शुक्ला

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