सरसी छंद सावन में जब आती राखी
सरसी छंद
विषय रक्षाबंधन
नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏
सावन में जब आती राखी , समय बड़ा अनुकूल।
रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाऊँ भूल ।
राखी का रिश्ता है कोमल,आए मन में प्यार ,
बदले में सम्मान चाहिए,नहीं हमे उपहार।।
रक्षा करना सब बहनों की, जब समय प्रतिकूल।
रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाऊँ भूल ।
बरस बरस जब कई बीतते, आते तुम हो याद ,
बहना जब घर तेरे आए ,करे नही फरियाद।
अपनी रक्षा खुद भी समझे ,रहे संग त्रिशूल ।
रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाऊँ भूल ।।
अटल प्रेम का धागा है यह, सजे कलाई शान ,
रक्षा सूत्र बँधे हाथों पर,रखना तुम भी मान।
सब पसंद के मेवे लाएँ ,लाएँ सुंदर फूल ,
रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाएँ भूल।।
कुमकुम चंदन सजा थाल है,आया शुभ दिन खास ,
रेशम की डोरी मैं बाँधूँ , जब तुम आओ पास ।
बना रहे त्योहार मनोरम, सब का है यह मूल,
रक्षाबंधन पर्व मनोरम ,कैसे जाएँ भूल ।।
सावन में जब आती राखी , समय बड़ा अनुकूल।
रक्षाबंधन पर्व मनोरम, कैसे जाऊँ भूल ।।
पूनम शुक्ला
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