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Showing posts from April, 2021
 भारत के वीर सैनिकों भारत के हे  रण बाकुरों, शत-शत करते नमन आपको। निशदिन प्रहरी बन रक्षा करते , अरि दलों से तनिक न डरते ।। किंचित  न विचलित होते पथ से,  फौलादी सा तुम जिगर हो रखते । शीश  न्योछावर किया देश पर , सीने पर तुम गोली सहते ।। क्या नहीं जरा भी  भय है तुमको , चट्टानों से टकराने जाते हो । बूढ़ी मां और भगिनी वचन को,  कैसे तुम ठुकरा पाते हो ।। वीर माँ के जाएं पुत्रों , हम सब हैं  गर्वान्वित तुम पर । सर्वस्व समर्पण किया देश पर  बलिदानी बन तुम जिऐं धरा पर।। रो-रो अश्रु सूखते कांता के , जो चातक विरही चातकी के ।  मन आगन पतझड़ सा लगता है , जब सीमा पर जाने का खत मिलता है ।। हम वीर सपूत हैं इसी देश के,  अंगारों पर चलना आता है।  मातृभूमि के पावन पथ पर , शीश चढ़ाना आता है ।। हो जन जन के हृदय में देश का गान,  तिरंगा ही हो हमारा साजोंसामान । तिरंगे के बेहतरीन परिधान में सजाना , अब मन में बस एक ही अरमान।। पूनम शुक्ला केंद्रीय विद्यालय पूर्वोत्तर रेलवे बरेली
 बेटियाँ  पपीहे की तान , कोकिल की कूक हैं बेटियाँ । वीणा के तारों का , मधुर संगीत है बेटियाँ ।  गिरी शिखर पर सूरज सी,    नवकिरण है बेटियाँ।  फूलों की खुशबू सी , घर में महकती है बेटियाँ।। अभावों में जी कर भी , स्वप्न साकार करती हैं बेटियाँ। समाज के तानो को , नजरअंदाज करती हैं बेटियाँ । जीवन की हर कठिनाई में,  हिम्मत ना हारती है बेटियाँ । अथाह कष्ट में भी,  धैर्य धारती है बेटियाँ ।। सूखे रेगिस्तान में,  अमृत सा जलप्रपात है बेटियाँ । अरुणिमा से निखर , अंबर को छूती है बेटियाँ । शिक्षित वन उच्चे ओहदों पर , आसीन हैं बेटियाँ।  अन्याय से लड़ने वाली,  मां दुर्गा की अवतार हैं बेटियाँ।।  सृष्टि की उत्पत्ति का,  खूबसूरत बीज है बेटियाँ। कल्पना से ऊंची उड़ान , भरती है बेटियाँ । बिखरी हुई रिश्तेदारी , ताउम्र निभाती है बेटियाँ।  नभ पर  देदीप्यमान , चमकता सितारा है बेटियाँ ।। दहेज की बलिवेदी पर , चढ़ती है बेटियाँ । स्वाभिमान कायम रख,  जीवन जीती है बेटियाँ।  अब अबला बेचारी,  कमसिन नहीं है बेटियाँ। लाचार मजबूर नहीं,...
 अनगढ़े शब्दों का सार,    अनछुए भावों का विचार है कविता ।      दिनकर का तेज़ पुंज ,                                     पूनम की चांदनी है कविता ।।                           शांत सागर की हिलोल,                               निर्मल गंगा की धार है कविता ।                   खूबसूरत मेघो का आभास ,                             खेतो की हरियाली है कविता ।।                            माँ वीणा का संगीत,                                      ...
 पृथ्वी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं ।।                                   🌍      हमारी पृथ्वी मेरी सुंदर प्यारी पृथ्वी ,  भू,भूमि धरा और धरती,   कितने नामों से तुझे पुकारूं , जन जन के दुख पल में हरती ।।                          खेतों से खलिहानों  तक,  बागों से बागानों तक,  सुमन बिखेरे धरा नाचती,  वसुधा मेरी प्रकृति दात्री   ।।             रंग-बिरंगे फूलों से है   ,     नई नवेली दुल्हन लगती,  देकर सुंदर रूप भूमि का,  वसुधा को हैस्वर्ग बनाती ।।                                 सिंचित कर मानव के मन को ,                         शीतल जल से कल कल करती  ,...
 प्रेरणास्रोत श्री राम धीरे धीरे  जपा  करो , नाम  श्री राम का  ,                                          अवधपुरी   में  बनेगा , धाम  श्री  राम का ।।         कौशल्या की ममता में , मिलेंगे श्री राम ही ,        सीने में बजरंगबली के ध्यान श्री राम का  ।।  मातृ पितृ के बंदन में हैं , ज्ञान श्री राम का ,  शबरी के  बेरों  से  ,सम्मान श्री  राम का ।                                                    घर  घर  में  पूजते हैं, भगवान  श्रीराम ही ,                                              निशदिन  अंत...
 कविता कैसी रच पाऊँ मैं *  मधुर ध्वनि से गुंजित होती , क्लान्ति दूर कर निर्मल बहती,  पाहनों  के तोड़ अवरोधों को,  पथिकों की है प्यास बुझाती।  चट्टानों से टकराकर भी , भागीरथी ना बन पाऊँ मैं, कविता कैसे रच पाऊँ मैं ।। छल प्रपंच का आलय प्याली,  कटुता की है बात निराली,  अनैतिकता के वर्चस्व ने छोड़ी है छाप , हृदय वाटिका में बैठे हैं आस्तीन के सांप । राग द्वेष की इस दुनिया में , बैरागी ना बन पाऊँ मैं  , कविता कैसे रच  पाऊँ मैं ।।  संस्कारों की शाला नगरी,  प्रतिमान सृजन को गढ़ने वाली,  राम कृष्ण से छली हुई है , बलिवेदी पर चढ़ी हुई है । नारी की इस पीड़ा को , साझा कैसे कर पाऊँ मैं, कविता कैसे रच पाऊँ मैं ।।  कैसी सुखद सलोनी बेला,  वीतराग बन मन अलबेला,  छंद ज्ञान से अज्ञानी मैं, भावों से हूं सदा शून्य मैं । यत्र तत्र वितरण कर भी,  काव्य सृजन ना कर पाऊँ मैं,  कविता कैसे रच पाऊँ मैं ।। पूनम शुक्ला केंद्रीय विद्यालय पूर्वोत्तर रेलवे बरेली
 शिरोमणि हिंदी                   आज सभी के मन में , हिंदी का सम्मान है, एक बार इसी वसुधा पर , हिंदी के सरताज है । हिंदी हम सब की भाषा,  हम सब की पहचान है , यही हमारी शान और यही हमारी जान है।। अब हम इसके साथ ,  विश्व में परचम लहराएंगे ,         जगत करें गुणगान हमारा ,  हम गर्वित हो जायेंगे ।           हिंदी भारत मां की बिंदी,  माथे पर शोभा पाएगी ,        बालमन पर अंकित होकर सारे जग में छाएगी ।। रहीम कबीर सूरऔरतुलसी                        विश्व में धूम मचायेंगे , महादेवी प्रसाद प्रेमचंद निराला,  सबके मन पर छायेंगे । चहूं और फैली खुशबू , इसकी समृद्धि फैलायेगी , हिंदी हिंदुस्तान और हिंदी विश्व पटल पर छायेंगी ।। मान हमारी हिंदी और,  शान हमारी हिंदी है , संस्कृत की पोती और , पाली की बेटी हैं । व्याकरणी इसकी   सहज   साँवरी,        ...

हिंदी कविता नव प्रभात सा

 नव प्रभात नव प्रभात सा  नव जीवन,                                         नव किसलय नव कुसुमों पर    ।                              नव सूरज की रश्मि रथी,  नव बेला की पंखुड़ियों पर।।                                                                                 विहगा चहके चहुँ  दिशाएं , कोयल कूजे डाली डाली पर ।                        पपीहे की तो मीठी तान रे ,                                पक्षी का कलरव धरती पर ।।       निशा पति...
 ए कोरोना ,अब तेरी बारी है । एक कोरोना अब तेरी बारी है, जन-जन को त्रस्त कर ने भेष बदल कर आई हो   राक्षसी रूप धर ए मूर्ख    हम को डराने आई हो , हौसले हैं मेरे बुलंद , तू डिगा न  पाएगी , तुझे परास्त होना ही होगा , क्योंकि मेरा प्रयास जारी है ।। यह कोरोना अब तेरी बारी है।।  अथाह समुद्र का मंथन किया, सूरज को मुट्ठी में भीच लिया फैसला मिटा सीमाओं को लांघ लिया , घर में बस कर है तुझको जीत लिया , मेरे मजबूत इरादों को तू ही हिला न  पाएगी , तुझे परास्त होना ही होगा , क्योंकि मेरा प्रयास जारी है । ए  कोरोना अब तेरी बारी है।।   खिलेगी धूप अवसाद का कोहरा छँटेगा  , खौफ का मंजर अब यूं ही ना रहेगा , मन का तम मिटा दीप यूं ही जलेगा,  हमारे आत्मविश्वास को डिगा ना पाएगी , काबू पाकर तुझ पर धरा जगमगाएँगी , अखंड भारत के विश्वास को तू हरा न पाएंगी, तुझे परास्त होना ही होगा , क्योंकि मेरा प्रयास जारी है ।। ए कोरोना ,अब तेरी बारी है ।। पूनम शुक्ला  प्रशिक्षित स्नातक शिक्षिका केंद्रीय विद्यालय पूर्वोत्तर रेलवे बरेली

चुनावी रैलियाँ

 *चुनावी रैलियाँ* धूल धूसरित होती , ये चुनावी रैलियाँ । मतदाताओं की जेब में , ठूसीं जाती है थैलियाँ।।  जनाब , नोटों की नहीं है थैलियाँ , नोटों की होती तो भी सब्र कर लेते । दूध मुहें  बच्चे के मुंह में , अमृत सा दूध उड़ेल देते ।। छह  महीने से फटी धोती , निहार रहे हैं मजबूरी में , ला देते एक चिकनी धोती , और कुछ समय संग  बिता लेते।।  बेटी की फीस किताबे बस्ते ,  जूते और न जाने क्या-क्या । लाकर दे देते एक लाल फ्रॉक,  बरसों की तमन्ना को पूरी कर देते ।। मात-पिता के कर्ज को भी था चुकाना , उन्हें सारे तीरथ धाम था कराना।  रह रह कर सुनते थे रोज उनके ताने  हर रोज पचासों  बनाते थे हम बहाने ।। पर हाय विधाता , जेब में आई काली नीली थैलियाँ , क्या फर्क पड़ता है थैलियाँ, कच्ची हो या पक्की , नशीली हो या जहरीली , हम तो बस पी के झूमेंगे इनके आगे आगे, भले करने पड़े हमे कितने ही फाँके ।। मंदिर सी पूजी जाएंगी उनकी हवेलियाँ, आजीवन तमगा मिल जाएगा करने को रंगरेलियाँ । जीत का सेहरा बंधेगा इनके सर पर, और सूनी हो जाएगी हमारी गालियाँ।। झोली उनकी भरी और, हमारे हाथ ...