*दिनांक-22-02-2022* *दिन-मंगलवार* *विधा-गीत* *प्रदत्त पंक्ति--------->>>* 🌌🌌🌌🌌🌌🌌🌌🌌🌌 धरा सुरक्षित रहे हमारी,मिल कर हम सब हवन करें, *हरियाली की भीख मांगते,कानन उपवन रुदन करें*।। तरुओं को सब काट काट कर सड़के चौड़ी कर डाली। दिखे नहीं गौरैया छोटी,दिखे नहीं कोकिल काली। विषय बड़ा गंभीर बना है,आओ इस पर मनन करें। *हरियाली की भीख मांगते,कानन उपवन रुदन करें*।। जंगल के जीवो का हमने,आश्रय उनसे छीन लिया। बना हवेली ऊंची ऊंची,काम कौन सा नेक किया। हरी भरी धरती के बिन हम, भीषण गरमी सहन करें। *हरियाली की भीख मांगते,कानन उपवन रुदन करें*। जंगल में जब मोर नाचते,हमको प्यारे लगते थे। दूर गगन में उड़ते पंछी,जग से न्यारे लगते थे। हरित वर्ण की आभा से अब, वसुधा अपनी चमन करें। *हरियाली की भीख मांगते कान्हा उपवन रुदन करें*।। पूनम शुक्ला
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Showing posts from March, 2022
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नमन मंच🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽 मनहरण घनाक्षरी विषय शहीद याद करें आज हम, पावन शहीद धर्म, मनाए आजादी पर्व, जग बलिहारी है।। वीरों को बुलाये कैसे, जग को बतायें कैसे, महके गगन बीच , केसर की क्यारी है ।। वीरों को नमन कर ,धरा को चमन कर , भारती के लाल तुम , विपदा ही टारी है।। अमर सपूत वीर ,अरि युद्ध कर चीर, तुमसे ही शान अब , भारत की न्यारी है।। पूनम शुक्ला
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सार छंद भारत देश हमारा प्यारा, रंगों का संगम है , अनुपम छटा धरा बिखेरती, मौसम सुन्दर नम है । उत्तर से दक्षिण तक फैली ,पावन सतलज गंगा , इंद्रधनुष जो सजा नभ में,लगे बहुत सतरंगा।। फल फूलों से भरी भूमि ये, नवजीवन देती है । कल कल करती जलधार यहॉं , तन मन हर लेती है । पग पखारने को मन आतुर , दूर से निहार रहा, समेटे किरणों को आदित्य क्षितिज पर वार रहा ।। पूनम शुक्ला
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सार छंद आओ बच्चों तुम्हे सुनाएँ , कल की बात निराली। सभी सखा जो मिल करते थे, बातें वो मतवाली ।। दादा दादी संग बैठना, हमें खूब था भाता। राजा रानी के किस्से सुन, मन भी खुश हो जाता।। रोज रात को छत पर सोना, अरु सब तारे गिनना। सप्त ऋषि की गाथा सुनकर, सो सपनों को बुनना।। हँसी ठिठोली सब मिल करते, करते कब मनमानी। रोज गाय को रोटी देते, खूब पिलाते पानी।। पूनम शुक्ला आपके अभ्यास को नमन🙏 बहुत बधाई पूनम जी👏👏👏👏👏👏👏
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सार छंद रंग बिरंगे फूलों से ज्यों,महके बगिया सारी । दूर देश से आती तितली,लगती सबको प्यारी।। आओ सुंदर पेड़ लगाएं, उपवन में सब मिलकर। चंपा जूही फूलों जैसे ,खूब हँसे हम खिलकर।। नेक काम की खुशबू भी तो, फैला करती जग में। मातृभूमि के वीर बाल की, गणना होती नग मे।। फूलों के जैसे तुम खिलना,टूट महक बिखराना। नश्वर जीवन जान जगत में, फिर माटी मिल जाना।। कलियों के संग काँटे रहते, लगती छटा निराली, बन गुलाब सरताज सभी का,महके डाली डाली।। खिला कमल जो कीचड़ में है,माँ विद्या को भाता, रंग-रूप औ गंध बताती, सबको रूप सुहाता ।। सुंदर फूल गुलाब खिले हो,सुरभित बगिया सारी। कर्म किए जा पावन नर अब, भला करे गिरधारी।। पूनम शुक्ला बहुत सुंदर रचना पूनम जी बहुत बहुत बधाई आपको👏👏👏👏👏👏👌👌👌👌👌👌वाह वाह क्या बात है👏👏👏👏👏