सरसी छंद। गंगा तेरा रूप विमल

 सरसी   छंद 

गंगा तेरा रूप  विमल है ,है अमृत सी धार ।

तेरे पग को चूमा करते ,बाल  वृद्ध नर, नार ।


उच्च चोटियाँ देख हिमालय ,करता है सत्कार।

 सीमा पर है सिंधु सुशोभित,सब का है अधिकार।


 प्रहरी बन रक्षा करता है ,देख शत्रु को आज ।

भारत के सिर  चमक रहा जो ,कैसा सुंदर ताज।


 जगत  गुरू  के   पथ  पर चलकर ,आज हमें अभिमान ।

भारत देश हमारा प्यारा ,करते हम सम्मान।।


पूनम शुक्ला

Comments

Popular posts from this blog

कहानी पार्ट 1

नया साल कविता प्रदीप छंद

संस्मरण बिस्तरबंद