विषय अर्थ जब खोने लगे ।
कविता
विषय अर्थ जब खोने लगे ।
रिश्ते भी जब अजीज होने लगे,
नैना भी दिल के साथ रोने लगे ,
करना प्रतीक्षा उस एक दिनकी,
नाम के अर्थ भी जब खोने लगे।
किस रिश्ते की बात करते जनाब
आज कोखजयी उदासीन है बेहिसाब ,
फर्क पड़ता नहीं माँ रहे दिनरात भूखी ,
और पाना चाहता है सुपुत्र का खिताब ।
पिता ने लाकर दी थी नीतिपरक किताब ,
पर उसके पन्नों पर चिपके रहते थे गुलाब ,
हमें क्या हमें तो चाहिए नशा और कबाब
उस पिता के पास दूजा ना हो कोई ख्वाब ।
रिश्ते बेईमानी से लगने लगे ,
शब्द अब अर्थ जब खोने लगे ,
अरे वाह बड़े समझदार ,
तुमभी समय के साथ होने लगे ।।
पूनम शुक्ला
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