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Showing posts from October, 2025

कहानी पार्ट 1

 कहानी घर घर की  "अरे वाह बहुत खूबसूरत है आपका बेटा " इस बात को सुनते सुनते पूरे 28 साल हो गए थे। सुंदर बहू लाना जोड़ अच्छा बनना चाहिए। पैसों के चक्कर में कोई ऐसी वैसी मत ले  आना। दहेज के लालच में मत फ़सना। ऐसी बातें सुन सुनकर नंदा तो बहू के सत्संगी सपनों में अक्सर खो जाया करती थी । उसके पैरों की पायल, हाथों में लाल लाल चूड़ियां, माथे पर बड़ी सी लाल बिंदी ,पैरों में महावर लगाकर आंगन में छन छन कर चलती हुई बहू की कल्पना तो मानो नंदा चौबीसों घंटे करती थी । दोनों भाई भी जब तक खूब हंसी मजाक करते थे। बहन  तो थी ही नहीं। दोनों एक दूसरे के भाई बहन सब कुछ थे ।रक्षाबंधन पर एक दूसरे को राखी बांध दिया करते थे। दोनों भाई  खूब प्यार से रहते थे ।जन्मदिन पर या नंदा के वैवाहिक वर्षगांठ पर खुद ही बाहर जाकर पार्टी प्लान कर लिया करते थे ।इस तरह घर के चारों सदस्य ईश्वर का आशीर्वाद मानकर  खुशनुमा जिंदगी गुजार रहे थे ।पर नंदा के मस्तिष्क में बहू का ख्याल निकलता ही नहीं था ।वह अपने बेटे राजन के लिए एक पढ़ी-लिखी सुशिक्षित सुंदर बहू की तलाश में लगी रहती  ।नंदा को भी कम्पनी चाहिए...

कहानी पार्ट 2

 पुरानी रीति परम्पराओं को कब तक माना जाए।सास ससुर की बेफिजूल बाते  हमारे परिवार में  यह होता है यह नहीं होता है।अरे भाई ,तब समय दूसरा था लोग एक दूसरे की बातों को समझते थे पर आज विकास वादी युग में किसको किसकी परवाह।  अब समय दूसरा है अब इन पुरानी  घिसी  पिटी परंपराओं को मानने से क्या लाभ। हम तो नहीं मानते हैं और न ही हमारे शिक्षित मायके के लोग।हमारा परिवार के लोग  इतने दकियानूसी नहीं है पर हमारे यहां ससुराल का बहुत बुरा हाल है  कितने अनपढ़ जाहिल पुराने खयालों  वाले लोग है । अगर हम भी इन सब बातों को माने तो मुझमें और अनपढ़ लड़की में क्या फर्क।विवाह के बाद ढ़ाई  साल ससुराल में रही ।क्या क्या सहन नहीं किया।आजकल की लड़कियां 12-12 बजे सोकर उठती है और मैं एक दिन सात बजे के बाद उठी तो कितनी बाते सुननी पड़ी ।सबने खूब गालियां दी। ऐसे ही कोरोना में मेरी सास बर्तन  तो मांज लेती थी पर क्या मजाल कि खाना बना दे ।मुझे सास ससुर देवर पति इतने बड़े परिवार का दोनों समय का खाना बनाना पड़ता था।और तो और कई बार मुझे नौकर कहा गया।मैने अपने मायके में कभी काम ...