सरसी छंद् सुंदर जीवन है तुम देखो,

 सरसी छंद्


सुंदर जीवन है तुम देखो,करते तुम क्यों नाश ।

 जहरीली है यह सब चीजें,बने हुए हो  दास ।।


 मात-पिता ने पाल पोष कर ,किया कौन अपराध।

 तुम पर है वे जान छिड़कते ,करते प्यार अगाध ।।


 देकर सिला कौन सा तुमने,दिला दिया है मान।

 भारी मन से चले गए वे , दिया सदा ही ज्ञान ।


कपड़ा रोटी नही पास में  ,रोते बच्चे आज।

 छोड़-छाड़ के ऐसा जीवन,करने लग कुछ काज ।।


नाली में तुम लोटा करते,पीके खूब शराब ,

मत कर यूँ बरबाद जवानी ,

 सेहत होय खराब।


 नहीं करे सरकारी बातें  ,लगे नशे पर रोक ।

बीमारी से दूर रहे सब ,भला लगे यह लोक।।


पूनम शुक्ला

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