शुभ रविवार आया

 मनहरण घनाक्षरी

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शुभ रविवार आया , ताप नहीं कम लाया ,

बार बार देखे नभ ,

चहुँ ओर घूम के ।।


लालिमा चमक  लिए,  संध्या संग सजे दिए ,

सूरज पश्चिम ओर ,

गया खूब धूम  के ।।


 अन्न धान सूख गए,   इंद्रदेव रूठ गए,

 बूँद नहीं पानी लायें,

मेघा बड़े सूम के ।।


 बाल वृद्ध गली-गली ,  खिले नहीं एक कली,

  आराधना करें धरा ,

 आओ मेघा झूम के ।।


 


पूनम शुक्ला

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