प्रातः वंदन
प्रातः वंदन
घनाक्षरी
प्यारा तेरा कृष्ण रूप ,जपे नित सुर भूप ,
कर्म रत जग सारा ,
*बात यही मान के*।।
नित नई लीला रचे ,दूध दही खूब चखे ,
ग्वाल बाल सब संग ,
*कर्म भगवान के*।।
राधा संग क्रीड़ा करें ,नाग राज वश करें ,
सुख चैन सब पाएँ ,
*बंशी धुन गान के* ।।
छोड़ सब मोह माया तज धूलि बृज छाया ,
धर्म युद्ध पार्थ रत ,
*सत्य सब जान के* ।।
पूनम शुक्ला
Comments
Post a Comment