पुस्तकें
पुस्तक
मन हो व्यथित ,
खोले पृष्ठ ,
हो संतृप्त ,
मुश्किलो का
हो समाधान ,
अनवरत ।।
निष्कलंक,
जीवन का ,
सिखाती सलीका ,
भर देती है,
जीवन में,
लेके तूलिका ।।
क्षण भंगुर ,
जीवन में ,
भर दे ओज ,
लेकर मन मे ,
अनंत परितोष ।।
खुले ज्ञान के
चक्षु , अनंत ,
असीमित ,
वेदों का ज्ञान ,
पाएं बनकर भिक्षु।।
उल्लसित हो काया ,
जब घर न हो
कोई साया ,
इस एकाकीपन में ,
पुस्तकें बनती
माया।।
अनंत
असीमित
गीता का ज्ञान
करे आराधन
पाएं संसाधन
मत कर अभियान।।
लेनी हो डिग्रियां ,
या पाना हो ज्ञान,
भरता है प्रकाश,
हरता है अज्ञान
बनती है सच्ची मित्र
बिखेरती खुशबू
बनकर इत्र ।।
पढ़ने की नहीं
कोई उम्र
बाल,युवा
या हो वृद्ध
ज्ञान जो सबने
मिलकर चखा
पाएं ईष्ट, सिद्धि
शत्रु हो या सखा।।
छोड़ो सारा जंजाल
पुस्तकों से करो प्यार
खुश रहो हर हाल ।।
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