सौम्य सवेरा
*सौम्य सवेरा!*
छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!*
[8,8,8,7 पर यति, वर्णिक छन्द,कुल 124 अक्षर,चार चरण::पदांत-गुरु!]
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आयी शुभ नव भोर,पँछी कूके चहुँ ओर,
वेला नव प्रभात की,
*खुशियाँ बरसती*
ऋषि मुनि जाग गये, चुन चुन फूल नये,
ईश आराधन करें,
*खुश्बू महकती*
मन का तमस मिटा,रवि का प्रकाश हटा,
घन घोर घटा छायी,
*चपला गरजती*
धरती की को कोख चीर, हरे भरे खेत हीर,
देखते मन मुदित,
*कोकिल चहकती*
अवगुण तज कर,गुण सब धर सर,
प्रभु के गुणगान को,
*अखियाँ तरसती*
- गंगा दशहरा, 21/6/21
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शुभ प्रभात!!प्रथम मन हरण घनाक्षरी
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