प्रातः वंदन
घनाक्षरी
प्रात काल
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निशा बीती अब जाग ,खेले कूदे दौड़ भाग,
कर्म पथ शुरू करें,
*मुख देव नाम से* ।।
(शाम जंच नहीं रहा)
राज सुख छोड़ कर ,भ्राता मुख मोड़ कर ,
मातृ आज्ञा मान लेना,
*सीख प्रभु राम से* ।।
प्रात देख मृग खग ,रखे धीरे धीरे पग ,
रात अब ढल गई ,
*सब जाएँ काम से* ।।
खुश होते जीव सब,नाचे रश्मि धरा जब,
मांगे देश प्रेम फिर,
*शिव सुख धाम से* ।।
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पूनम शुक्ला
28/6/21
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