सूरज

 सूरज

छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!*


नभ पर रवि छाया ,

साथ ताप धूप लाया,

 लाल रंग सूर्य सजे,

 *निशा गई हार के*।।


 आग फैले चहु ओर,

 लाल रंग करे शोर ,

धरा तुम  धैर्य धारो,

*जग पर वार के* ।।


गोल गोल तुम सजे,

 कर खूब खूब मजे ,

तम को दूर कर ,

*गया सृष्टि पार के* ।।


रह नहीं पाया जग,

 पेड़-पौधे जीव खग,

 तुम सर्व शक्ति मान ,

*बाल वृद्ध नार के* ।।


पूनम शुक्ला

25/6/21

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