ऑनलाइन शिक्षण और शिक्षकों की भूमिका
*ऑनलाइन शिक्षण में शिक्षकों की भूमिका*
शिक्षक वह मोमबत्ती के समान है जो स्वयं जलकर अपने ज्ञान रूपी प्रकाश से छात्र के जीवन का अज्ञान रूपी अंधकार दूर करता है। समाज में शिक्षक को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया है। भारतीय संस्कृति में शिक्षक को हमेशा आदर की दृष्टि से देखा जाता है। वेदों में भी *आचार्य देवो भव* अर्थात आचार्य देवता के समान है ऐसा कहा गया है । किसी भी युग में शिक्षक के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है क्योंकि शिक्षक ही छात्र का मित्र और पथ प्रदर्शक बनकर उसको विवेकी और ज्ञानी बनाता है। पुरातन काल से लेकर आज तक शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है । शिक्षक ज्ञान ,समृद्धि और प्रकाश का एक पुंज होता है । वह चाहता है कि उसके प्रत्येक विद्यार्थी का अपना अस्तित्व हो ।शिक्षा का मूल उद्देश्य छात्र के जीवन को सशक्त बनाना और परिवार समाज राष्ट्र के लिए एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है। इसमें छात्र और अध्यापक की भूमिका सर्वाधिक प्रभावी सिद्ध हो रही है ।
अगर वर्तमान समय की बात की जाएँ तो इस समय पूरा विश्व कोरोना नामक वैश्विक महामारी से जूझ रहा है ।सम्पूर्ण विश्व मे समय समय पर लॉक डाऊन लगाया जा रहा है ,और इसका प्रभाव हमारे बच्चों पर भी पड़ रहा है । इस कठिन वक्त में सभी स्कूल ,कॉलेज ,शिक्षण संस्थाएं लॉकडाउन के कारण बंद की गयी हैं । बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से संपन्न हो पा रही है । ऑनलाइन शिक्षा के महत्व से आज सभी परिचित हो गए हैं। ऑनलाइन माध्यम हमारे बच्चों के भविष्य से जुड़ा है जब कोरोना महामारी का प्रारंभ था। तब कुछ समय के लिए सोच कर इस माध्यम को सरकार ने और शिक्षण संस्थाओं ने प्रारंभ करने की योजना बनाई थी और सब के विचार से अल्पकालिक थी । लेकिन अब कोरोना की स्थिति को देखते हुए लगता है कि हमारा साथ इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है ।और हमें इस माध्यम को लेकर गहन विचार विमर्श की जरूरत है । क्योंकि ऐसी शिक्षा से बच्चों का शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का भी संबंध है।आज तकनीक का प्रयोग हर क्षेत्र में किया जा रहा है ।साथ ही शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर भी किया जा रहा है ।
प्रौद्योगिकी के विकास में आज अनेक प्रकार की शिक्षण सामग्री उपलब्ध है । और उसका लाभ ऑनलाइन शिक्षा को मिल रहा है ।ऑनलाइन शिक्षा विभिन्न माध्यमों से होती है जैसे यूट्यूब पावरप्वाइंट स्लाइड लाइव
व्हाइट बोर्ड इत्यादि । इन सभी माध्यमों से शिक्षक अपनी रचनात्मक शिक्षा को छात्रों तक पहुंचाता है ।बच्चे इंटरनेट के द्वारा अपने कंप्यूटर ,लैपटॉप, टेबलेट, स्मार्टफोन के उपयोग से घर बैठकर पढ़ाई करते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि शिक्षक विश्व में कहीं पर भी रहकर अपने छात्रों को शिक्षित कर सकता है। सभी जानते हैं कि आज का युग डिजिटल युग है । व्यावहारिकता का स्थान यांत्रिकी ने ले लिया है। इसका सर्वाधिक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि किसी भी कारण से शिक्षण संस्थान बंद किए जाते हैं , तो छात्र ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा जारी रख सकते हैं। अगर आज ऑनलाइन माध्यम ना होता है तो बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती । आज हमारे सामने एक प्रश्न है कि ऑनलाइन शिक्षण की विद्यार्थियों के जीवन में क्या क्या उपयोगिता है और क्या वे इस माध्यम से अधिकाधिक लाभ ले पा रहे हैं। आज के संकट काल में बच्चे सारे दिन घर में रहते हैं और एकल परिवार होने के कारण अकेलेपन की समस्या से जूझ रहे है बाल सुलभ चंचलता कहीं गुम सी होती जा रही है ।उनका स्कूल जाना, दोस्तों से मिलना, खेलना, शिक्षकों से सीधे बात करना समाप्त सा हो गया है ,केवल ऑनलाइन ही ऐसा माध्यम है जिससे जुड़कर बच्चे अपना समय व्यतीत कर रहे हैं । तथा अपनी शिक्षा भी जारी रख पा रहे हैं ।ऑनलाइन शिक्षा अभी देश के प्रत्येक बच्चे की पहुँच में नही है । गरीब तबके के बच्चों तक इस माध्यम को पहुँचाने में हमारे सामने बहुत सारी चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों का अभाव, दूरदराज स्थानों में खराब इंटरनेट व्यवस्था, बिजली की उचित व्यवस्था ना होना, कंप्यूटर लैपटॉप टेबलेट का ना होना है । गरीब तबके की बात छोड़िए क्या भारत जैसे देश के मध्यमवर्गीय परिवारों में जहां एक या अधिक बच्चे हैं तो क्या संभव है कि हर बच्चे को अलग-अलग स्मार्ट डिवाइस उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही सबसे आवश्यक है, प्रैक्टिकल शिक्षण जो ऑनलाइन माध्यम से संभव नहीं है ।
पर हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, जहां इसका प्रयोग करवाना एक चुनौती है वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो इसके लाभ भी दृष्टिगत होते हैं। सबसे बड़ा लाभ है कि छात्र एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करता है, उसके सामने केवल शिक्षक होते हैं ।पर कक्षा में अन्य बच्चे भी होते है , जहां उसका ध्यान एकाग्र चित्त नहीं हो पाता है। इस प्रणाली के माध्यम से बच्चों को सीखने की क्षमता में भी सुधार होता है कुछ बच्चे अपने आप में संकोची होते हैं कक्षा में अपनी जिज्ञासा कभी शांत नहीं कर पाते हैं ।पर ऑनलाइन माध्यम से अपने शिक्षक से निसंकोच प्रश्न पूछते हैं ,और अपने जिज्ञासा का समाधान भी कर लेते हैं ।इस प्रकार हम कह सकते हैं कि उनके जीवन में सकारात्मक प्रभाव के साथ सीखने की प्रक्रिया में भी सुधार होता हैं । इसमें अध्यापक की महती भूमिका है शिक्षकों को इस शिक्षा के लिए अन्य स्थान या विद्यालय नहीं जाना पड़ता है इससे उनके समय की बचत हो जाती है ।
इस माध्यम से शिक्षक अध्यापन को बेहतर बनाने के लिए नवीन टूल्स का प्रयोग करता है ताकि बच्चे आसानी से समझ सकें । आज सभी व्याख्यान और शिक्षण सामग्री इसी प्लेटफार्म से प्रदान की जाती है। जिससे छात्र घर पर रहकर इसका लाभ प्राप्त कर सकते हैं ।देश के किसी भी कोने में रहने वाले शिक्षकों के व्याख्यान ,वीडियो कोई भी छात्र कभी सुन सकता है। ऑनलाइन कक्षा की रिकॉर्डिंग कर सकता है ।और समय-समय पर सुनकर उसका लाभ उठा सकता है ।
आर 0ए0 लैम्ब ने कहा है " विद्यालय शिक्षक से मैं यह कहना चाहता हूँ कि उनको यह नहीं भूलना चाहिए कि उनका प्रमुख कार्य केवल निर्देश देना नहीं वरन शिक्षित करना है। उनको अपने शिष्यों के मस्तिष्क में केवल ज्ञान नहीं भरना है वरन् उनके चरित्र की आधारशिला भी स्थापित करनी है उन्हें उनके अंतःकरण में साहस शिष्टता व मर्यादा की आधारशिला रखनी है"
आज हमारे शिक्षक इस ऑनलाइन माध्यम से भी पूरी ईमानदारी ,कर्मठता, तल्लीनता से अपने शिक्षण कार्य को अंजाम दे रहे है ।
अंत में यह कहना अनुचित न होगा कि आज के मुश्किल भरे दौर में शिक्षकों ने सारथी की भूमिका निभायी हैं ।उन्होंने वर्चुअल कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षित ,प्रशिक्षित करने का कार्य किया है ।साथ ही साथ समाज को भी इस संक्रमण से बचाने के लिए जागरूक किया है । हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी मन की बात कार्यक्रम में शिक्षकों की प्रशंसा की ।उन्होंने कहा कि" हमारे देश के शिक्षकों ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए न केवल पढ़ाई में तकनीक का प्रयोग करना सीखा बल्कि अपने छात्रों को भी शिक्षित किया ।"
अंत मे हम कह सकते है कि
ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली भविष्य में बेहद कारगर सिद्ध होगी।
अंत में कुछ पंकितयों से मैं अपनी बात समाप्त करती हूँ -
नाटक प्रश्नोत्तरी और खेल खेल में करते वाद विवाद ,
यूट्यूब पर देखते पाठ,
गूगल पर संवाद,
गूगल फॉर्म पर परीक्षाएं आयोजित हुई कई बार , है भविष्य की बुनियाद ।।
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