सियाराम

 सियाराम

घनाक्षरी

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हरे राम हरे राम,

 जपो नित  नई शाम ,

बेड़ा पार करें प्रभु,

 सब काम छोड़ के ।।


 राम तेरी लीला न्यारी,

 संग सजे सिया प्यारी,

भक्त जन शोभा पाते ,

दोनों कर जोड़ के।।


 मात-पिता आज्ञा माने ,

लगे ऋषि संग जाने,

 मोक्ष पाए दैत्य जब,

बंधनों को तोड़ के ।।


वन बीच कष्ट सहा,

दुख सिया साथ रहा,

दूजा अर्थ सिया शक्ति ,

 चली धारा मोड़ के।।

💥🍁🌹🌸🌻🌸🌹🍁🌺


पूनम शुक्ला

30/6/21


समीक्षार्थ🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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