बीती ताहि बिसारिए आगे की सुध लेह
*बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध लेह*
जो भी परिस्थितियां मिले, कांटे चुभे, कलियां खिलें ।
हारे नहीं इंसान, है संदेश जीव का यही ।"
किसी कवि के कथन का आशय यही है कि हमे कभी हिम्मत नही हारनी चाहिए । पूरे आत्मविश्वास से वर्तमान का आनंद लेना चाहिए । आत्मविश्वास सभी सुखों के मूल में विराजमान है जिस व्यक्ति ने स्वयं पर विजय प्राप्त कर ली , उसे दुनिया का कोई भी व्यक्ति परास्त नहीं कर सकता है । हमें अपने अंदर ऐसा विश्वास जागृत करना होगा तभी हम श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ इंसान बन पाएंगे । पर दुर्भाग्य ! हम हमेशा एक अवसाद में जीते हैं ,कोई एक कमी अपने अंदर तलाश लेते हैं परिणाम स्वरूप निराशा और आलस्य हमें चारों ओर से घेर लेता है ,और हमारा शारीरिक और मानसिक पतन होना प्रारंभ हो जाता है ।जो बीत गया उसको याद करने से क्या लाभ । *बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध लेह* । आत्मविश्वास का शाब्दिक अर्थ है स्वयं पर विश्वास एवं नियंत्रण करना । अपने सभी कार्यों को बिना डर के पूरे साहस व हिम्मत से पूरा करना । अगर हम अपने जीवन में पूर्णतया सफल होना चाहते हैं, तो हमें खुद पर विश्वास करना ही होगा । आत्मविश्वास के बिना हमारा जीवन सुगंध रहित पुष्प के समान है । आत्मविश्वासी लोग निश्चित ही अपने कार्य क्षेत्र में सफल होते हैं । हिम्मत और आत्मविश्वास के बल पर व्यक्ति अपना जीवन बहुत सुंदर तरीके से जीता है । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विश्वास है तो जीवन में आने वाली बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को भी आप सरलता से पार कर देते हैं । स्वयं के अंदर अगर आप आत्मविश्वास जाग्रत करना चाहते है तब आप को सकारात्मक सोच के स्वामी बनना होगा। इमर्सन ने कहा है *संसार के सारे युद्ध में इतने लोग नहीं हारते जितने कि सिर्फ घबराहट से* इसका सीधा सा अर्थ है *मन के हारे हार है मन के जीते जीत *
आप नकारात्मक बात करने वाले लोगों से खुद को दूर रखें । ऐसे लोगों के साथ रहे ,जो अपने जीवन में आशावादी सोच रखते हो , जीवन जीने के लिए जिस प्रकार सांसो की जरूरत पड़ती है उसी प्रकार से एक सफल जीवन जीने के लिए आत्मविश्वास की जरूरत पड़ती है । हमारे सामने अनेक ऐसे उदाहरण है कि विपरीत परिस्थितियों में भी साहस के साथ सामना करके आत्मविश्वास से लबरेज़ होकर अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित करा दिया । अरुणिमा सिन्हा को भला कौन भूल सकता है कि दोनों पैर ट्रेन से कटने के बाद भी एवरेस्ट पर फतह प्राप्त कर ली । यह उनका आत्मविश्वास नहीं था ,तो और क्या था ? महात्मा गांधी ,नेपोलियन , मैडम क्यूरी ,एकलव्य, शिवाजी , अल्बर्ट आइंस्टीन का आविष्कार, स्कॉटलैंड का राजा ब्रूस ऐसे कितने उदाहरण है जिनसे सिद्ध होता है कि आत्मविश्वास के बल पर इंसान असंभव कार्य को भी संभव कर सकता है ।
गांधी जी कहते थे *आशा अमर है उसकी आराधना कभी निष्फल नहीं होती है*
इसलिए हमें आत्मविश्वास से जीना चाहिए ।और हर पल उस प्रभु का धन्यवाद देना चाहिए जिसने आपको इतना सुंदर शरीर दिया ,बुद्धि दी,विवेक दिया ।
आपसे धनवान इस दुनिया में कौन है । प्रसन्न रहने के लिए धन की आवश्यकता नहीं है,
अगर आप ऐसा समझते हैं तो भारत में केवल कुछ प्रतिशत ही प्रसन्न है । खुशियाँ पैसों से नहीं खरीदी जा सकती है । प्रसन्नता मन की खोज है और उसको पाने के लिए आपके मन में आत्मविश्वास का होना परम आवश्यक है। आत्मविश्वास के बल पर व्यक्ति असंभव कार्य को भी संभव करने की शक्ति रखता है अगर आप सफलता पाना चाहते हैं तो सबसे महत्वपूर्ण है आत्मविश्वास को बनाए रखें। मनुष्य को असफलता से प्रेरणा लेकर सफलता की ओर बढ़ना चाहिए और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना चाहिए। सफलता हम सबका अधिकार है और हम सफल तभी होंगे, जब हमारे अंदर सफल होने की जिजीविषा होगी, जबरदस्त इच्छाशक्ति होगी , तब हम क्रियाशीलता ,इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास से किसी भी कार्य को करने में सफल हो सकते हैं। साथ ही हमको आलस , चिंता , तनाव क्रोध से दूर रहना चाहिए किसी ने कहा है
“जब नाव जल में छोड़ दी ,
तूफान ही में मोड़ दी ,
दे दी चुनौती सिंधु को,
फिर धार क्या मझधार क्या”
हमको विपरीत परिस्थितियों में भी आशा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए ।दृढ़ संकल्पी व्यक्ति कभी अकर्मण्य नहीं हो सकता है । नेपोलियन ने कहा था “ असंभव शब्द मूर्खों के शब्दकोश में मिलता है “ साधन संपन्न व्यक्ति भी निराशा के बादलों में रहने पर असफल हो जाते हैं । असीम दृढ़ शक्ति के कारण पांडवों ने कौरवों को परास्त कर महाभारत का युद्ध जीत लिया । गेटे ने कहा है “प्रत्येक वस्तु के संबंध में निराश होने की अपेक्षा आशावाद होना बेहतर है”
आत्मविश्वास जन्मजात गुण नहीं है । आप दृढ़ता पूर्वक अभ्यास करके इस गुण को विकसित कर सकते हैं । और थोड़ी सी मेहनत से अपने जीवन में आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं । इसके लिए बस कुछ बातों का ध्यान रखना होगा , सर्वप्रथम आप अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करें जो बिल्कुल स्पष्ट हो । अगर आपने अपने जीवन में बहुत बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है तो उसके लिए आपको परिश्रम भी बहुत करना पड़ेगा । अगर आप लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं और आपको सफलता नही मिल पा रही है तो निश्चित रूप से आपके प्रयास में कुछ कमी रह गयी है ऐसा समझकर अपने प्रयास में परिवर्तन करना चाहिए ।अपने सभी कार्य को समय पर करें । टालना बंद करें। अनुशासन में रहें , और आज का काम कभी भी कल पर ना छोड़ें । आप अपने जीवन में हमेशा सच बोले , ईमानदार बनें ।दयालु बनें । दूसरों पर आश्रित न रहें ।स्वयं पर तथा ईश्वर पर विश्वास रखें ।सकारात्मक सोच के साथ काम करें। प्रकृति से जुड़े । व्यवहार कुशल रहे । साथ ही दृढ़ निश्चय बनने का संकल्प करें ।एक बार धोखा मिलने पर उस व्यक्ति पर कभी विश्वास न करें । जीवन में कभी किसी से अपनी तुलना न करें ।आप अपने मन में विश्वास रखें कि आप प्रभु की सर्वश्रेष्ठ रचना है । अगर आप इन बातों का ध्यान रखते हैं तो आप अपने अंदर आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं । और जीवन में निर्धारित किसी भी लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं ।
आपको जो प्राप्त नही हुआ है,उसका अफसोस न करके वरन ईश्वर ने जो आपको दिया है उसी को बहुमूल्य मानकर स्वीकार करें ।दलाई लामा ने कहा है “
एक शांत मन आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास लाता है इसलिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है “
हमे अपने अंतःकरण में आशा के शुभ बीज बोने चाहिए ।जब आपका अंतःकरण आत्मविश्वास से भरा होता है तब आप शांत होते है और शांत तथा एकाग्र चित्त होकर कुछ भी करने में सफल हो जाते है । यह हमें परम कल्याण को प्राप्त कराते है । अंत में किसी शायर की पंक्तियों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करती हूं
*हौसले बुलंद रखिए मंजिले मकसूद के
तेज हवाओं में भी चिराग जला करते हैं*
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