पुष्प
*पुष्प*
छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!*
[8,8,8,7 पर यति, वर्णिक छन्द,कुल 124 अक्षर,चार चरण::पदांत-गुरु!]
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लाल नीले पीले फूल,कभीनही चुभे शूल ,
चाहे जैसे देखे मन ,
शुभ दिन साल के* ।।
लगे नहीं कोई चोट ,मन नहीं कछु खोट ,
चाहे हम चढ़े गंग,
*चाहे देव भाल के* ।।
बाल मन प्यारो लागे,सारो जग न्यारो लागे,
बाल भी है पुष्प सम ,
*देखो हर काल के* ।।
दिन भर खूब खिले ,रात सब नहीं हिले ,
रात रानी खूब फले ,
*सजे नदी नाल के* ।।
--पूनम शुक्ला
26/6/21
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शुभ प्रभात!!
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