मेरे पापा

 मेरे पापा


हारना  कहते किसे ,

कभी जाना नहीं,

प्रतिकूल परिस्थिति में भी,

रहे अनुकूल,

वह मेरे पापा थे ।।


भीषण झंझावातों में 

डगमगाए ना जिनके कदम 

शिरीष के पुष्प से वनरागी,

वह मेरे पापा थे ।।


तोड़कर चट्टानों को वृक्ष बन,

तने रहे जो सदा ,

सागर से धीर गंभीर ,

वह मेरे पापा थे ।।


जो थे मेरे साथ ,

थे इरादों के पक्के ,

सूरज की किरणों से दमकते,

वह मेरे पापा थे ।।


मां के साथ खुद की भी,

खुशियों की परवाह  न की,

लुटा कर  सारी खुशियां हम पर, 

वह मेरे पापा थे ।।


लेकर ईटों की दीवारों को ,

प्यारा घर बना दिया,

पर कुछ अनमने से चल दिए,

वह मेरे पापा थे।।


सब की भलाई में जीवन,

 समर्पण करने वाले ,

अपने लिए कभी न सोचा ,

ऐसे मेरे पापा थे।।


ताउम्र बनाते रहे,

बिगड़े हुए रिश्ते,

रिश्तों से ही खंजर खाने वाले,

वह मेरे पापा थे।।


 कुछ पूर्व जन्मों का कष्ट ,

भोगा था इस तन से,

इस जन्म में चींटी भी ना मारने वाले

ऐसे मेरे पापा थे ।।


श्राप की तरह गुजारे 

अंत के चंद महीने ,

रिश्तो को परख गये,

वह मेरे पापा थे।।

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