राधेश्याम
राधेश्याम
छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!*
[8,8,8,7 पर यति, वर्णिक छन्द,कुल 124 अक्षर,चार चरण::पदांत-गुरु!]
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छन्द : *मनहरण घनाक्षरी!*
राधे श्याम तेरी लीला नत सारा जहां यहॉं ,
तेरा रूप जग प्यारा,
हम बलि जाएँ रे ।।
सारी बिधि देखा जाँचा, नहीं कोई दूजा साँचा ,
तेरा संग पाते जब
सब सुख आएँ रे।।
बंशी धुन सुन सुन ,मद मस्त होते सब ,
तुझे मान ईश सब ,
जन गीत गाएँ रे ।।
ग्वाल बाल सखा संग,देखे सारे रूप रंग ,
देख कर प्रेम रूप ,
नेत्र सुख पाएँ रे।।
पूनम शुक्ला
27/6/21
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