सवेरा

 मनहरण घनाक्षरी

सवेरा


नव भोर नव दिन ,

माला जपु गिन गिन,

 रवि सा प्रकाश लिए ,

*सुखद प्रवास के* ।।


 योग करो स्वस्थ रहो ,

प्रभु गीत नित गहो ,

 जीवन आनंद मानो,

 *मधुर सुवास के*।।


 दिन बहुत खास कर ,

 देवो से ही आस कर ,

 सुंदर सत्य है मानो ,

*अटल विश्वास के* ।।


कोकिल की कूक प्यारी ,

पपीहे की टेर न्यारी ,

 जीवो पर दया कर,

 *जीवन निवास के*।।


पूनम शुक्ला

21/6/21

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