- माता आराधना 


मनहरण घनाक्षरी


लाल परिधान सजे ,मंदिर संगीत बजे।

 विराजो भवानी माता,

 जग रूप  छाये रे।।


शैलपुत्री गिरी वासा, नर नारी सब दासा।

 चंदन वंदन रोली,

 श्रद्धा संग लाए रे।।


 मातृशक्ति रूप तेरा, सज  गया द्वार मेरा।

 दयावान रूप मयी,

 भक्त सब आये रे।।


 दुर्गा आराधन कर ,दुख पाप सब हर ,

जब तप पूजा ध्यान ,

शांति सुख पाये रे।।



पूनम शुक्ला

बरेली उत्तर प्रदेश


               रचना स्वरचित ©



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