आदित्य निकल
मनहरण घनाक्षरी
आदित्य निकल आए ,प्रात गीत मन भाये ,
काम करें स्वयं सभी,
आप अब ठान लो ।।
चारों ओर हरियाली ,तरु बैठे हर डाली,
शीतल पवन चले,
सही सब मान लो ।।
भोर हुई आंखें खोल, नीक लगे मीठे बोल,
परिश्रम जीवन का ,
आनंद है जान लो।।
निशा खूब अलबेली, सारिकाएं अठखेली ,
पूनम प्रभात देख ,
सुमधुर तान लो ।।
पूनम शुक्ला
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