मनहरण घनाक्षरी


बाला देखे नभ रंग ,मोहक मुस्कान संग,

 नीला रंग खूब सजे ,

 देखें मनुहार के ।।


 हृदय हिलोर  मारे ,छाये धरा नभ तारे ,मन भाये ये सावन,

गीत है मल्हार के ।।


 देख पिय शरमाई  ,प्रेम गीत खूब गायी ,

आनंद समाये मन ,

दिन ये त्योहार के । 


जीवन सुखद क्षण ,साक्षी बना कण कण  ,

गीत राग मन बसे ,

 प्रीत उपहार के ।।


पूनम शुक्ला

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