करुण रस मनहरण घनाक्षर🙏🏽
गौतम सन्यासी बन,पहुंचे निर्जन वन ,
पीपल की छांव तले ,
आसनी बिछाई रे ।।
पुत्र से ना मोह जोड़ा,पत्नी बिलखता छोड़ा ,
अपराध कौन किया ,
जान नहीं पायी रे ।।
लालन पालन कैसे, बिन पिता करें मात,
यही सोच सोच कर ,
चेतना गवायी रे।।
देशहित घर त्यागा, तोड़ नाजुक धागा,
यशोधरा संग पुत्र
,दया नहीं आयी रे।
पूनम शुक्ला
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