मनहरण घनाक्षरी


अब देखो नई भोर

खग वृन्द करे शोर,

महके सुन्दर वन

-पवन आने लगी। 



 सब  मिल वृक्ष रोपे

मेघ जल धरा सौपे

हरियाली चहुंओर

 वसुधा पाने लगी। 



तब सुन बंशी धुन

भक्ति गीत मन सुन

देखके वसंत ऋतु

कोयल गाने लगी! 



कब आये बदरिया ?

खाली अब गगरिया ,

भादों ऋतु सूने सूने

पूनम जाने लगी!!

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