घनाक्षरी


सुख मय दिन बीते हाथ नहीं कभी रीते ,

श्रद्धा रखें दिन-रात

 प्रभु का सहारा है ।।


प्रभु तुम निशिदिन रहते सवेरे शाम ,

करें नहीं कोई फ़िक्र

 भाव ही हमारा है।।


 सुख-दुख छाव धूप खूब मिले धन रूप 

चिंतन मनन करो

 मिटा अंधियारा है।।


 प्रभु की संतान जान बंधु लो अपना मान,

 पूनम नमन करें,

 जग उजियारा है।।

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पूनम शुक्ला

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