कुंडली हिंदी
हिंदी को हम पूजते ,हिंदी है अभिमान ।
हिंदी को मत भूलिये, रत्नों की यह खान ।।
रत्नों की है खान ,लगे सबको अति प्यारी ,
कह पूनम कविराय ,जगत की राजदुलारी ।।
भाषा में सिरमौर, सजे मस्तक में बिंदी।
मिश्री का हो स्वाद , धरा पर महके हिंदी।।
पूनम शुक्ला
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