सरसी छंद

खेल खिलौने लेकर आया, ले लो बिटिया आज।

गुड़िया का अब ब्याह रचाओ, और करो तुम राज।। 


नहीं चाहिए गुड्डा गुड़िया ,नहीं चाहिए कार,

 हमको तो बस पुस्तक ला दो रंग बिरंगी चार।।


 पढ़ पढ़ के उस पुस्तक को मैं ,बनूँ बहुत विद्वान।

 छोड़ो खेलो की अब बातें, पाना हमको ज्ञान ।।


आज सीखना हमको है अब, भाला तीर कमान।

 देश सुरक्षित रहे हमारा,चलना सीना तान।।


 टूट फूट कर सभी खिलौने, हो जाते बेकार।

 नया सबक सिखलाती पुस्तक, पड़े नहीं अब मार।।



पूनम शुक्ला

Comments

Popular posts from this blog

कहानी पार्ट 1

नया साल कविता प्रदीप छंद

संस्मरण बिस्तरबंद