कहानी पुरानी सुनो, कथा रुचिकर गुनो।

सावित्री  दुहिता नृप,

मुनि वर  लावे रे।।


सत्यवान थाबेचारा ,छिन गया राज सारा,

 भाग्य देखो खेल करे ,

सावित्री है   पावे रे ।।


वर्ष बीता अभी एक ,काल चक्र रुके नहीं ,

 सत्यवान छोड़े जग ,

लेने यम आवे रे ।।


भार्या पीछे हटी नहीं ,शत पुत्र वर लिया,

  प्रसन्न बहुत यम,

 खुशी-खुशी जावे रे।।


पूनम शुक्ला

क्रमांक 28

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