मन में उमंग भरे

 नेक कर्म

घनाक्षरी


मन में उमंग भरे, दुख ताप सब हरे ,

 चारों ओर खुशहाली ,

 प्रभु ऐसा वर दो ।।


 चेहरे हो खूब खिले ,द्वेष मिटा गले मिले ,

 खुशियां हो घर घर ,

नहीं कोई डर दो ।।


 चार दिन सजे रैला , मन मत कर मैला ,

सत्य धर्म पथ चल,

 काम ऐसा कर दो ।।


 चाहो तुम  यश पाना, जग पूरे तुम छाना,

 नेक राह  चुनकर,

 प्रेम खूब गर दो ।।


पूनम शुक्ला

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