एक अधूरा सफर
नमन पटल को
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 01
दिनांक:- 03/07/2021
वार:- शनिवार
विषय: एक अधूरा सफर
बहुत ख्वाइशें थी मेरी और बहुत अरमान,
मेरी जिंदगी में थे तुझ जैसे साजो सामान ।।
करना चाहती थी पूरा *एक अधूरा सफर* ,
पर किसी ने होने न दिया मुझे आत्मनिर्भर ।।
करने थे समाज राष्ट्र हित बहुत से काम्,
*एक अधूरा सफर* ने बना दिया मुझे नाकाम।।
तुम थे नादान कभी, कभी पड़े विफर,
और पूरा न करा पाएं, *एक अधूरा सफ़र*।
जान जाती तो करती न कभी तुमसे दोस्ती
तुम्हारी दोस्ती से लाख अच्छी है उनकी दुश्मनी।।
पूनम शुक्ला
बरेली उत्तर प्रदेश
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