ऊषा काल
घनाक्षरी
प्रातः वंदन
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
उषा काल आता देख ,नव सजे रक्त रेख,
निशा निशा पति संग,
*मधुर लजात हैं* ।।
ओस बिंदु फैले धरा ,तरु रंग भूरा हरा,
धरा संग मिल कर ,
*मंद गति जात है*।।
रवि रश्मि चहुँ ओर ,आती हुई नभ भोर ,
नर सब काम पर ,
*गगन मुस्कात है* ।।
नव पुष्प खिल गए ,पर्ण सब हिल गए ,
देख कर मृदु रूप,
*गीत हम गात है* ।।
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पूनम शुक्ला
2/7/21
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