सूरज है रश्मि संग
प्रात वंदन घनाक्षरी
सूरज है रश्मि संग ,तेज रखे अंग अंग,
जगमग होती धरा ,
*रूप जैसा चाहिए*।।
पक्षी गण बोल रहे ,मुख पुष्प खोल रहे ,
चारों ओर हरियाली ,
*जग कैसा चाहिए*।।
बीती अब निशा काली ,कूहके भ्रमर आली ,
सात रंग सजे धरा ,
*रंग बैसा चाहिए*।।
प्रातः पूजा थाल लिए ,पुष्प संग सजे दिए ,
भोलेनाथ दर्शन को ,
*भाव ऐसा चाहिए* ।।
पूनम शुक्ला
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