प्रेरणास्रोत श्री राम
धीरे धीरे जपा करो , नाम श्री राम का , अवधपुरी में बनेगा , धाम श्री राम का ।।
कौशल्या की ममता में , मिलेंगे श्री राम ही ,
सीने में बजरंगबली के ध्यान श्री राम का ।।
मातृ पितृ के बंदन में हैं , ज्ञान श्री राम का ,
शबरी के बेरों से ,सम्मान श्री राम का । घर घर में पूजते हैं, भगवान श्रीराम ही , निशदिन अंतर्मन से करें बखान श्रीराम का ।।
अहिल्या के उद्धार में,काम श्री राम का,
केवट की उतराई में वचन श्री राम का ।
पीत पीतांबर धारी बने हैं श्री राम ही ,
लक्ष्मण की सेवा में ज्ञान श्री राम का ।।
दोष किसका था ,वैदेही या श्रीराम का,
कष्ट था भयंकर दुखद ,परिणाम था ।
मर्यादा पुरुषोत्तम गुणों की खान,श्रीराम ही ,
अग्नि में समाई जानकी,राजधर्म श्री राम का ।।
प्रेम समर्पण और त्याग से करें , आराधन श्री राम का ,
सीता सहित विराजों उर में , दिव्य रूप श्री राम का ।
रामराज्य की परिकल्पना , करेंगे साकार श्रीराम ही ,
तीन लोक में गूँज रहा , जय जय घोष श्री राम का ।।
- पूनम शुक्ला
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