पृथ्वी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं ।।
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हमारी पृथ्वी
मेरी सुंदर प्यारी पृथ्वी ,
भू,भूमि धरा और धरती,
कितने नामों से तुझे पुकारूं ,
जन जन के दुख पल में हरती ।।
खेतों से खलिहानों तक,
बागों से बागानों तक,
सुमन बिखेरे धरा नाचती,
वसुधा मेरी प्रकृति दात्री ।।
रंग-बिरंगे फूलों से है ,
नई नवेली दुल्हन लगती,
देकर सुंदर रूप भूमि का,
वसुधा को हैस्वर्ग बनाती ।।
सिंचित कर मानव के मन को ,
शीतल जल से कल कल करती ,
सहकर भीषण आतप रवि का ,
दुख संताप सबका हरती ।।
कितने कांटे बोये वक्ष पर,
फिर भी धरती मां कहलाती,
करते कलरब विहग वृंद सब,
अभिसिंचित कर नवजीवन देती।।
-पूनम शुक्ला
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