ए कोरोना ,अब तेरी बारी है ।



एक कोरोना अब तेरी बारी है, जन-जन को त्रस्त कर ने भेष बदल कर आई हो 

 राक्षसी रूप धर ए मूर्ख   

हम को डराने आई हो ,

हौसले हैं मेरे बुलंद ,

तू डिगा न  पाएगी ,

तुझे परास्त होना ही होगा ,

क्योंकि मेरा प्रयास जारी है ।।

यह कोरोना अब तेरी बारी है।।


 अथाह समुद्र का मंथन किया, सूरज को मुट्ठी में भीच लिया फैसला मिटा सीमाओं को लांघ लिया ,

घर में बस कर है तुझको जीत लिया ,

मेरे मजबूत इरादों को तू ही हिला न  पाएगी ,

तुझे परास्त होना ही होगा ,

क्योंकि मेरा प्रयास जारी है ।

ए  कोरोना अब तेरी बारी है।।



  खिलेगी धूप अवसाद का कोहरा छँटेगा  ,

खौफ का मंजर अब यूं ही ना रहेगा ,

मन का तम मिटा दीप यूं ही जलेगा,

 हमारे आत्मविश्वास को डिगा ना पाएगी ,

काबू पाकर तुझ पर धरा जगमगाएँगी ,

अखंड भारत के विश्वास को तू हरा न पाएंगी,

तुझे परास्त होना ही होगा ,

क्योंकि मेरा प्रयास जारी है ।।

ए कोरोना ,अब तेरी बारी है ।।



पूनम शुक्ला

 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षिका

केंद्रीय विद्यालय पूर्वोत्तर रेलवे बरेली

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