बेटियाँ 


पपीहे की तान ,

कोकिल की कूक हैं बेटियाँ ।

वीणा के तारों का ,

मधुर संगीत है बेटियाँ ।

 गिरी शिखर पर सूरज सी,   

नवकिरण है बेटियाँ।

 फूलों की खुशबू सी ,

घर में महकती है बेटियाँ।।


अभावों में जी कर भी ,

स्वप्न साकार करती हैं बेटियाँ।

समाज के तानो को ,

नजरअंदाज करती हैं बेटियाँ ।

जीवन की हर कठिनाई में,

 हिम्मत ना हारती है बेटियाँ ।

अथाह कष्ट में भी,

 धैर्य धारती है बेटियाँ ।।


सूखे रेगिस्तान में, 

अमृत सा जलप्रपात है बेटियाँ ।

अरुणिमा से निखर ,

अंबर को छूती है बेटियाँ ।

शिक्षित वन उच्चे ओहदों पर ,

आसीन हैं बेटियाँ।

 अन्याय से लड़ने वाली, 

मां दुर्गा की अवतार हैं बेटियाँ।।


 सृष्टि की उत्पत्ति का, 

खूबसूरत बीज है बेटियाँ।

कल्पना से ऊंची उड़ान ,

भरती है बेटियाँ ।

बिखरी हुई रिश्तेदारी ,

ताउम्र निभाती है बेटियाँ।

 नभ पर  देदीप्यमान ,

चमकता सितारा है बेटियाँ ।।


दहेज की बलिवेदी पर ,

चढ़ती है बेटियाँ ।

स्वाभिमान कायम रख, 

जीवन जीती है बेटियाँ।

 अब अबला बेचारी, 

कमसिन नहीं है बेटियाँ।

लाचार मजबूर नहीं, 

धधकती चिंगारी है बेटियां।।


पूनम शुक्ला

केन्द्रीय विद्यालय पूर्वोत्तर रेलवे बरेली

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