हिंदी कविता नव प्रभात सा
नव प्रभात
नव प्रभात सा नव जीवन, नव किसलय नव कुसुमों पर । नव सूरज की रश्मि रथी,
नव बेला की पंखुड़ियों पर।।
विहगा चहके चहुँ दिशाएं ,
कोयल कूजे डाली डाली पर ।
पपीहे की तो मीठी तान रे , पक्षी का कलरव धरती पर ।।
निशा पति अपने किरण समेटे , चला जा रहा दूर क्षितिज पर ।
पुरवाई है अंग लपेटे,
न्योछावर हो गई सृष्टि धरा पर ।।
भोर मनोहर सुबह सुहानी,
खुशबू फैले अंबर पर ।
हरियाली की चुनर ओढ़े,
यौवन छलका प्रकृति पर ।।
उठो देश के वीर सपूतो ,
नाज हमें भी होगा तुम पर ।
आलस्य प्रमाद का समय नहीं है ,
यश फैले संपूर्ण जगत पर ।।
पूनम शुक्ला
प्रशिक्षित स्नातक (संस्कृत)
केंद्रीय विद्यालय पूर्वोत्तर रेलवे
बरेली ।
Comments
Post a Comment