सार छंद
आओ बच्चों तुम्हे सुनाएँ ,
कल की बात निराली।
सभी सखा जो मिल करते थे, बातें वो मतवाली ।।
दादा दादी संग बैठना,
हमें खूब था भाता।
राजा रानी के किस्से सुन,
मन भी खुश हो जाता।।
रोज रात को छत पर सोना,
अरु सब तारे गिनना।
सप्त ऋषि की गाथा सुनकर,
सो सपनों को बुनना।।
हँसी ठिठोली सब मिल करते,
करते कब मनमानी।
रोज गाय को रोटी देते,
खूब पिलाते पानी।।
पूनम शुक्ला
आपके अभ्यास को नमन🙏
बहुत बधाई पूनम जी👏👏👏👏👏👏👏
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